आपका बच्चा बड़ा होकर लेफ्टी बनेगा या फिर राइटी यह बात आपके स्तनपान पर निर्भर करता है। कितने समय तक शिशु को स्तनपान करवाया है। दरअसल, एक शोध में पता चला है कि स्तनपान यानी की ब्रेस्टफीडिंग का समयावधि शिशु के हाथ का उपयोग करने पर असर डाल सकता है। यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन में किया गया।
इस शोध के अनुसार नौ माह से ज्यादा समय तक स्तनपान करने वाले शिशु दाएं हाथ से काम करते हैं। दूसरी तरफ पाया गया कि जिन बच्चों ने नौ माह से कम दूध पिया है या बोतल से दूध पिया है उनमें बाएं हाथ से काम करने वाले अधिक मिलें।
हाथ पर नियंत्रण करने वाला दिमाग का हिस्सा
इसका कारण यह हो सकता है कि हाथ पर नियंत्रण करने वाला दिमाग का हिस्सा दिमाग के एक हिस्से में स्थिर कर जाता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि संभव है कि स्तनपान से यह प्रक्रिया गति पकड़ लेती है, जिससे शिशु के दाएं या बाएं हाथ से काम करने का निर्धारण होता है। हमारे हाथ और बांहो की हरकत हमारे दिमाग की वजह से होती है जो बदले में रीढ़ की हड्डी को हरकत करने के लिए सिग्नल भेजता है। लेकिन दिमाग का जो हिस्सा हमारी हरकत के लिए जिम्मेदार है वो शुरुआत से ही रीढ़ की हड्डी से जुड़ा नहीं होता है।
बच्चे का किस हाथ का अधिक इस्तेमाल करना उसी वक्त समझ आ जाता है जब बच्चा गर्भ में अपने 13 हफ्तों में अंगूठा चूसना शुरू करता है। विशेषज्ञों की मानें तो बच्चा राइटी होगा या लेफ्टी यह बात बहुत हद तक बच्चे के जीन्स पर भी निर्भर करती है। यानि परिवार में यदि माता-पिता में कोई बाएं हाथ का इस्तेमाल करता है तो भी बच्चा लेफ्टी हो सकता है। यानि कुल मिलाकर आपका बच्चा पैदाइश ही लेफ्टी या राइट हैंडेड होता है। लेकिन आप चाहें तो बचपन से ही उसे दाहिने हाथ से काम करने पर ज़ोर डाल सकते हैं।