चिकनगुनिया से पीड़ित रोगी दर्द से बेहाल रहता है। यह रोग मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है। बता दें, मच्छर की लार में मौजूद चिकनगुनिया का वायरस व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर इस बीमारी को फैलाता है। इस बीमारी में रोगी को तेज बुखार, जोड़ों में दर्द , शरीर में सूजन,सर्दी-खांसी जैसी शिकायत रहती है।लेकिन अगर समय रहते इस जादुई काढ़े का सेवन कर लिया जाए तो जल्द ही इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है।
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यह बीमारी सबसे ज्यादा बारिश के मौसम में शुरू होती है। इससे बचने के लिए मौसम बदलते ही तीन दिनों तक सुबह-शाम इस काढ़े का सेवन करें।
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इस काढ़ें को बनाने के लिए आठ औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हरड़, आंवला, कुटकी, चिरायता, वासापत्र, नीमपत्र और गिलोय की जरूरत होती है।
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इस काढ़े को पीने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया के साथ शुगर और पीलिया के मरीजों को भी यह काढ़ा लाभ पहुंचाता है। इस काढ़े को बनाने के लिए सबसे पहले हरड़, बहेड़ा, आंवला, कुटकी, चिरायता, वासापत्र, नीमपत्र और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण तेयार कर लें। रोजाना दस ग्राम चूर्ण एक गिलास पानी में उबाल लें। जब एक चौथाई पानी बच जाए तो इस गुनगुने पाने को पी लें।
चिकनगुनिया से पीड़ित व्यक्ति को सिर्फ अनार, पपीते और सेब का ही जूस पीना चाहिए। लेकिन मौसमी और संतरे जैसे फल और उसके जूस का सेवन करने से बचें। इसके अलावा मच्छर से बचने के लिए अपने घर में नीम के पत्ते और गुग्गल का धुआं करते रहें।