कैंसर का नाम सुनते ही मरीज और उनके परिवार के मन में इलाज, उसके साइड इफेक्ट्स और ठीक होने की संभावनाओं को लेकर कई सवाल उठने लगते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस में हुई तरक्की ने कैंसर के इलाज को पहले से अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाया है।
आज कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसी कई उपचार पद्धतियां उपलब्ध हैं। इन सभी का काम करने का तरीका अलग-अलग होता है और इनका चुनाव कैंसर के प्रकार, स्टेज और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाता है।
आखिर कीमोथेरेपी और रेडिएशन में क्या अंतर है? इम्यूनोथेरेपी कैंसर से लड़ने में शरीर की मदद कैसे करती है और टार्गेटेड थेरेपी किस तरह कैंसर सेल्स को निशाना बनाती है? आइए, सीनियर कंसल्टेंट, हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट डॉ. नरेंद्र अग्रवाल से विस्तार से जानते हैं।
कैंसर के इलाज की 4 प्रमुख पद्धतियां, जानें कैसे करती हैं काम
कैंसर का इलाज केवल एक तरीके से नहीं होता। मरीज की बीमारी, कैंसर के प्रकार, स्टेज, जेनेटिक म्यूटेशन और ओवरऑल हेल्थ के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग ट्रीटमेंट का चुनाव करते हैं। कई बार बेहतर परिणाम के लिए एक से अधिक उपचार पद्धतियों को मिलाकर भी इस्तेमाल किया जाता है।
1. कीमोथेरेपी (Chemotherapy): दवाओं से कैंसर सेल्स पर हमला
कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज की एक प्रमुख पद्धति है। इसमें विशेष दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो तेजी से विभाजित होने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या उनकी वृद्धि रोकने का काम करती हैं। इन दवाओं को साइटोटॉक्सिक ड्रग्स कहा जाता है।
हालांकि, ये दवाएं केवल कैंसर सेल्स को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि शरीर की कुछ तेजी से बढ़ने वाली सामान्य कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कीमोथेरेपी के संभावित साइड इफेक्ट्स:
- बालों का झड़ना।
- मुंह में छाले और पाचन संबंधी समस्याएं।
- व्हाइट ब्लड सेल्स में कमी।
- प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन का कम होना।
- थकान, कमजोरी और संक्रमण का खतरा।
डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार एक या एक से अधिक कीमोथेरेपी दवाओं का कॉम्बिनेशन दे सकते हैं। इलाज के बाद कई सामान्य कोशिकाएं धीरे-धीरे रिकवर कर जाती हैं।
2. रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy): विशेष किरणों से ट्यूमर पर प्रहार
रेडिएशन थेरेपी में दवाओं के बजाय हाई-एनर्जी रेडिएशन यानी विशेष ऊर्जा वाली किरणों का इस्तेमाल किया जाता है। ये किरणें कैंसर कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती है या वे नष्ट हो जाती हैं।
इस उपचार में आमतौर पर शरीर के एक निश्चित हिस्से में मौजूद ट्यूमर को निशाना बनाया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी की खास बातें:
- ट्यूमर वाले हिस्से को सटीक रूप से टारगेट किया जाता है।
- रेडिएशन की कुल डोज को छोटे-छोटे हिस्सों यानी फ्रैक्शंस में दिया जा सकता है।
- सामान्य ऊतकों को रिकवर होने का समय मिलता है।
- कुछ कैंसर में इसे कीमोथेरेपी के साथ दिया जाता है।
इसके संभावित साइड इफेक्ट्स में त्वचा पर लालिमा, थकान और इलाज किए जा रहे अंग के अनुसार अन्य समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
3. इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): शरीर की इम्यूनिटी को बनाती है कैंसर के खिलाफ मजबूत
इम्यूनोथेरेपी कैंसर के इलाज की आधुनिक पद्धतियों में से एक है। इसमें ऐसी दवाओं और सेलुलर तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उनसे लड़ने में मदद करती हैं।
इसके संभावित साइड इफेक्ट्स:
इम्यूनोथेरेपी से बुखार, थकान, एलर्जी और इम्यून सिस्टम के अत्यधिक सक्रिय होने से फेफड़ों, आंतों या अन्य अंगों में सूजन हो सकती है। CAR-T थेरेपी में साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं। ध्यान दें कि इम्यूनोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स सामान्य कीमोथेरेपी से अलग हो सकते हैं और बाल झड़ना इसका सामान्य साइड इफेक्ट नहीं है।
4. टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy): कैंसर के खास म्यूटेशन को बनाती है निशाना
टार्गेटेड थेरेपी कैंसर के इलाज की एक ऐसी आधुनिक पद्धति है, जिसमें कैंसर कोशिकाओं के विकास के लिए जिम्मेदार खास जीन, प्रोटीन या मॉलिक्यूलर बदलावों को निशाना बनाया जाता है। इसके लिए मरीज के कैंसर की मॉलिक्यूलर और जेनेटिक जांच की जाती है। जांच में किसी खास म्यूटेशन या बायोमार्कर की पहचान होने पर उसके अनुसार दवा का चुनाव किया जाता है।
इसका सबसे चर्चित उदाहरण CML (Chronic Myeloid Leukemia) है। CML में BCR-ABL फ्यूजन जीन के कारण कैंसर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है। इसके इलाज में इमैटिनिब (Imatinib), जिसे ग्लीवेक (Gleevec) नाम से भी जाना जाता है, एक प्रभावी टार्गेटेड दवा है। इस दवा ने CML के इलाज में बड़ा बदलाव किया है और कई मरीजों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
टार्गेटेड थेरेपी के फायदे और संभावित साइड इफेक्ट्स:
- कैंसर के खास मॉलिक्यूलर टारगेट पर काम करती है।
- सही बायोमार्कर वाले मरीजों में प्रभावी हो सकती है।
- -ई दवाएं सामान्य कोशिकाओं को पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में कम प्रभावित करती हैं।
- इसके बावजूद त्वचा संबंधी समस्याएं, दस्त, थकान और लिवर संबंधी दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
डॉक्टर की सलाह: कैंसर का इलाज बीच में न छोड़ें
डॉ. नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, कैंसर के इलाज में सही समय पर सही उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। मरीज को डॉक्टर द्वारा बताए गए ट्रीटमेंट प्लान का पालन करना चाहिए। इलाज के दौरान किसी भी तरह का साइड इफेक्ट होने पर डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं बंद करना या इलाज बीच में छोड़ना बीमारी के नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है। कैंसर के इलाज का चुनाव हमेशा बीमारी की प्रकृति, जांच रिपोर्ट और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा किया जाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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