कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का खतरा
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डिस्लिपिडेमिया के मैनेजमेंट को लेकर गाइडलाइंस
हृदय स्वास्थ्य की प्रमुख संस्थाओं ने डिस्लिपिडेमिया के मैनेजमेंट को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। डिस्लिपिडेमिया हमारे खून में फैट या कोलेस्ट्रॉल का असामान्य स्तर है। यह स्थिति हृदय रोग, स्ट्रोक और एथेरोस्क्लेरोसिस के खतरे को बढ़ाती है। मुख्य रूप से खराब जीवनशैली मोटापा और आनुवंशिकता के कारण ये समस्या होती है।
- एक अनुमान के मुताबिक, अकेले अमेरिका में हर 4 में से 1 वयस्क में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन-कोलेस्ट्रॉल ( LDL-C) का स्तर ज्यादा पाया जा रहा है, जिससे दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
- इस नई गाइडलाइंस में लिपिड की मात्रा में गड़बड़ी को ठीक करने के लिए साक्ष्य-आधारित सुझावों को बताया गया है।
- इससे व्यक्ति में एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (ASCVD) के खतरे को कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज धमनियों में वसा जमा होने के कारण होता है और यह विश्व स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण है। इस गाइडलाइन का मुख्य फोकस हेल्दी लाइफस्टाइल के जरिए इसके खतरे को कम करना है।
वजन को कंट्रोल बनाए रखना, नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी, तंबाकू वाले प्रोडक्ट्स से बचना, नींद की आदतों में सुधार और डॉक्टर द्वारा दी गई कोलेस्ट्रॉल की दवाओं का लेना आपके लिए जरूरी है।
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कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का कैसे कम करें खतरा
गाइडलाइन तैयार करने वाली कमेटी के चेयरमैन, जॉन्स हॉपकिन्स सिसारोन सेंटर फॉर द प्रिवेंशन ऑफ हार्ट डिजीज के डायरेक्टर केनेथ जे. पोलिन कहते हैं, हम जानते हैं कि 80% या उससे ज्यादा कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों को रोका जा सकता है। बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल इस जोखिम को कम कर सकता है।
- हम कोलेस्ट्रॉल कम करने के पहले कदम के तौर पर हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों को बढ़ाने की सलाह देते हैं।
- हालांकि कुछ समय तक लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने के बाद भी लिपिड के आंकड़े मनचाही सीमा के अंदर नहीं आते हैं।
- ऐसे में हमें लिपिड कम करने वाली दवा को अब ज्यादा जल्दी शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए।
- लंबे समय तक बैड कोलेस्ट्रॉल को कम रखने से भविष्य में होने वाले दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिमों से सुरक्षा मिलती है।
दिल की बीमारियों का खतरा कैसे कम करें?
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डिस्लिपिडेमिया मैनेजमेंट गाइडलाइंस की महत्वपूर्ण बातें
2026 के डिस्लिपिडेमिया मैनेजमेंट गाइडलाइंस के अनुसार, वयस्कों को 19 वर्ष की आयु में कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए। इस जांच को कम से कम हर पांच साल में एक बार दोहराना चाहिए ताकि संभावित जोखिमों का जल्द पता लगाने में मदद मिल सके।
अगर हाई कोलेस्ट्रॉल के समय रहते इलाज न किया जाए तो ये रक्त वाहिकाओं को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकता है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के अक्सर कोई प्रत्यक्ष लक्षण नहीं दिखते, इसलिए इसे मैनेज करना जरूरी है।
कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइंस में रिस्क असेसमेंट का नया टूल शामिल
2026 की कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइंस में एक अहम बदलाव यह है कि पुराने रिस्क प्रेडिक्शन मॉडल्स की जगह अब AHA PREVENT-ASCVD रिस्क कैलकुलेटर का इस्तेमाल किया जाएगा।
- पहले इस्तेमाल होने वाले मॉडल्स में यह पाया गया था कि वे दिल के दौरे और स्ट्रोक के 10 साल के रिस्क को 40–50 प्रतिशत तक ज्यादा बताते थे।
- नया टूल एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर बीमारी (ASCVD) होने के 10 साल और 30 साल, दोनों के रिस्क का अनुमान लगाता है।
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स्रोत:
ACC/AHA Issue Updated Guideline for Managing Lipids, Cholesterol
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