शरीर के लिए धूप गर्मी में भी जरूरी है, नहीं तो आपकी हड्डी और मांसपेशियां कमजोर हो जाएंगी। ऊर्जा के लिए भी जिंदगी में धूप चाहिए। अगर आप गर्मी में धूप में बिल्कुल नहीं निकलते हैं, तो आपकी हड्डी और मांसपेशियां कमजोर हो जाएंगी। साथ ही डायबिटीज, हार्ट अटैक और कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा भी रहता है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के डॉक्टरों की एक रिसर्च में पता चला है कि देश की 90 फीसदी शहरी आबादी विटामिन डी की कमी की शिकार है। रिसर्च में यह भी पता चला है कि तेज गर्मी में बाहर नहीं निकलने के चलते मरीजों की तादाद इस मौसम में तेजी से बढ़ती है। यही नहीं, बहुत सारे लोग धूप में काले होने के डर से क्रीम लगाकर निकलते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसकी वजह से भी धूप त्वचा तक नहीं पहुंचती है और विटामिन डी नहीं मिल पाती है।
भारत में सूरज की रोशनी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। आम धारणा है कि यहां के लोगों के शरीर में धूप से मिलने वाले विटमिन डी की कमी नहीं हो सकती, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। यहां बड़ी संख्या में लोग विटमिन डी की कमी से पीडि़त हैं। भारतीय लोगों में विटमिन डी की कमी के दो प्रमुख कारण हैं। पहला है पहनावा। शरीर को धूप का फायदा मिले, इसके लिए शरीर के एक तिहाई हिस्से का खुले रहना जरूरी होता है, लेकिन प्रचलित भारतीय पहनावे में शरीर का अधिकांश हिस्सा ढंका रहता है।
दूसरा प्रमुख कारण है, सिटिंग जॉब का बढ़ता प्रचलन। लोग एयरकंडिशंड कार में बैठकर ऑफिस आते हैं, दिनभर एसी में बैठकर काम करते हैं और दिन ढले घर चले जाते हैं। इस लाइफस्टाइल में उन्हें धूप में बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिलता, जिसके चलते वे धूप के स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी नहीं उठा पाते। इसके अलावा विटमिन डी की कमी के कई अन्य कारण भी हैं जैसे डार्क स्किन कॉम्प्लेक्शन होना।
डार्क स्किन में मेलेनिन की मात्रा अधिक होती है। मेलेनिन अल्ट्रावायलेट किरणों को त्वचा में समाने से रोकता है। अब तक धूप के फायदों को लेकर सबसे प्रचलित तथ्य यही था कि इसमें विटमिन डी होता है, जो हड्डियों व जोड़ों की मजबूती और विकास के लिए जरूरी है। इससे रिकेट्स और ऑस्टियो मलेशिया जैसी बीमारियों से बचाव होता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में हुए नए शोधों में यह बात सामने आई है कि धूप अन्य अंगों के विकास के लिए भी जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, धूप हमें कई बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है। जैसे डायबिटीज, दिल का दौरा और कैंसर।
हर दिन उचित मात्रा में धूप लेने से टीबी होने की आशंका भी कम होती है। धूप मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। साथ ही इससे डिप्रेशन भी दूर होता है। गर्मी के दिनों में सुबह 10 बजे तक या फिर शाम को पांच बजे के बाद का समय धूप लेने के लिए सबसे मुफीद है। जब सूर्य का प्रकाश हमारी आंखों के संपर्क में आता है, तो रेटिना के कुछ हिस्से सक्रिय हो जाते हैं, जिससे हमारे शरीर में सेरोटोनिन का स्त्राव होता है, जो सकारात्मक ऊर्जा के साथ हमारे मूड को बेहतर करता है और खुशी का अहसास करता है|
विशेषज्ञ कहते हैं...
धूप से हमें विटामिन डी मिलता है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। आजकल नवजात बच्चों में पीलिया की शिकायत काफी हो गई है। ऐसे में इनको रोज धूप में कुछ देर रखना चाहिए। हृदय रोगियों के अलावा मधुमेह के मरीजों को सर्दियों के साथ गमियों में भी धूप लेनी चाहिए, इससे उनका कोलेस्ट्रॉल स्तर बरकरार रहता है। साथ ही वे तमाम तरह के संक्रमणों से बच जाते हैं। धूप में बैठने से सूरज की रोशनी से निकलने वाली यूवी किरणें इम्यून सिस्टम को हाइपरएक्टिव होने से रोकती है और इस तरह व्यक्ति सोराइसिस जैसी बीमारियों से मुक्त रहता है। -डॉ. सचिन अग्रवाल (त्वचा रोग विशेषज्ञ)