एमएमआर वैक्सीनेशन में कमी का देखा जा रहा है असर
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शिशु टीकाकरण दरों में गिरावट के दुष्प्रभाव
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शिशु टीकाकरण दरों में गिरावट के कारण दुनियाभर में करोड़ों बच्चे गंभीर बीमारी और मृत्यु के बढ़ते खतरे का सामना कर रहे हैं। मीजल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर) वैक्सीनेशन में गिरावट के कारण ब्रिटेन सबसे अधिक प्रभावित देश माना जा रहा है, जहां बच्चों में खसरा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में 3 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पूरी तरह से एमएमआर वैक्सीन नहीं लगाया गया है वहीं 1.43 करोड़ बच्चों को वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगी है।
आलम ये है कि जिस ब्रिटेन को साल 2017 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मीजल्स फ्री घोषित कर दिया था, वहां इस रोग के मामले फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं।
बच्चों में बढ़ता खसरा रोग का खतरा
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टीकाकरण कवरेज में भारी गिरावट के दुष्प्रभाव
यूरोप और मध्य एशिया के 53 देशों में किए गए सर्वे में पाया गया है कि यहां टीकाकरण कवरेज 2019 के स्तर की तुलना में औसतन एक प्रतिशत कम रहा। 2024 में, इनमें से ज्यादातर देश खसरे से प्रतिरक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक 95% टीकाकरण दर को भी पूरा नहीं कर पाए, लगभग एक तिहाई देशों ने 90% से कम कवरेज की सूचना दी।
वैक्सीनेशन में ब्रिटेन का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। 2024 में केवल 89% बच्चों को ही पहला एमएमआर टीका लगाया गया, जबकि जर्मनी में यह संख्या 96%, फ्रांस, इटली और जापान में 95% और अमेरिका और कनाडा में 92% थी।
टीकाकरण में कमी का देखा जा रहा है असर
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दुनियाभर में खसरे के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, ये स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा जोखिम बनकर उभरता हुआ देखा जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम कहती है, खसरा सबसे संक्रामक रोगों में से एक है। वैक्सीन कवरेज में मामूली गिरावट भी विनाशकारी उछाल ला सकती है। हर बच्चे की सुरक्षा के लिए, हमें हर देश में, हर जिले में वैक्सीनेशन कवरेज बढ़ाने की जरूरत है।
यूरोप में विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. हंस क्लूज कहते हैं-
पिछले साल ही, हमारे क्षेत्र में लगभग 3 लाख से ज्यादा लोगों को काली खांसी हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना से भी ज्यादा है। इस बीच 2024 में 1.25 से ज्यादा खसरा के मामले देखे गए जो 2023 की तुलना में दोगुना है। ये सिर्फ संख्याएं नहीं हैं, बल्कि लाखों परिवार इस पीड़ा में हैं कि उनके बच्चे बीमार हैं जबकि थोड़ी सी सावधानी से इसे रोका जा सकता था।"
भारत में खसरा रोग के मामले
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भारत के लिए भी चिंता
भारत कुछ दशकों पहले तक खतरा से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक रहा था, हालांकि टीकाकरण को बढ़ावा देकर इस रोग के जोखिमों को पिछले वर्षों में काफी कम कर दिया गया था। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 से 2021 के बीच भारत में खसरे के मामलों में 62% की गिरावट आई, इस दौरान प्रति दस लाख जनसंख्या पर 10.4 से घटकर 4 मामले रह गए थे।
हालांकि महामारी के दौरान राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान पर भी असर देखा गया जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे खसरे के टीके से चूक गए। लिहाजा देश के कई हिस्सों से पिछले दिनों बच्चों में खसरा के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। इसको लेकर विशेषज्ञों की टीम ने अलर्ट किया है।
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स्रोत
Misinformation, access and cuts – the UK’s measles surge explained
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