जिले में फाइलेरिया ने अपने पैर पसार लिए हैं। 12 से 16 नवंबर तक चले रेंडम सर्वे में 25 बच्चों में फाइलेरिया के लक्षण पॉजीटिव पाए गए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। जिले में फाइलेरिया से निपटने के लिए अब तक हेल्थ सर्विस की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। हालांकि, मरीजों को मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
भारत सरकार के निर्देशन पर जिले में फाइलेरिया कार्यक्रम के अंतर्गत ट्रांसमिशन ऐसेसमेण्ट सर्वे कराई गई। सर्वे में सभी विकास खंडों के जूनियर हाईस्कूल सरकारी व निजी को चिंह्नित कर रेंडम चार विद्यालयों में से प्रत्येक स्कूल के 16 बच्चों में फाइलेरिया की जांच की गई। यह जांच जिले के कुल 31 स्कूल के 578 बच्चों का परीक्षण कर उनमें से 25 बच्चों में फाइलेरिया होने संभावना पाई गई। जिसकी रिर्पोट सोमवार तक आ जाएगी। जिससे पर इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को उपचार मुहैया कराया जाएगा। यह बीमारी मच्छर के काटने से होती है। जिससे सामान्यत: हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। इसके मच्छर अधिकतर गंदगी में पनपते हैं। संक्रमित व्यक्ति को काटकर यह मच्छर संक्रमित हो जाते हैं। इसके बाद यही संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं। इससे संक्रमित व्यक्तियों को हाथी पाँव व हाइड्रोसिल का खतरा बढ़ जाता है। सामान्यत: तो इसके कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं।
ये हैं फाइलेरिया के लक्षण
बुखार आना।
बदन में खुजली होना
पुरुषों के जननांग, आस-पास दर्द व सूजन होना
हाथ, पैर में सूजन आना।
हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों का सूजन)
इस तरह करें बचाव
घर के आस पास मच्छरों को न पनपने दें।
घर के पास में सफाई का विशेष ध्यान रखें।
सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
जिले में नहीं है हैल्थ सर्विस की सुविधा
जिला में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज तक फाइलेरिया से निपटने के लिए हैल्थ सर्विस की सुविधा नहीं मिली है। जिससे मरीज को क्षेत्र व गांव में ही इस बीमारी का इलाज नहीं मिल पा रहा है। लोगों को मजबूर होकर उपचार के लिए जिलाअस्पताल व अन्य बड़े शहरों में उपचार के लिए जाना पड़ता है। जिससे लोगों को भारी परेशानियां उठानी पड़ती हैं।