क्या आप खाना कुर्सी पर बैठकर खाते हैं या फर्श पर पालथी मारकर? यह सिर्फ पसंद या परंपरा का सवाल नहीं है, बल्कि आपके पोश्चर, पाचन, जोड़ों और खाने की आदतों से भी जुड़ा हो सकता है। भारत में फर्श पर बैठकर खाना खाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जबकि आधुनिक जीवनशैली में डाइनिंग चेयर और टेबल आम हो गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि शरीर के लिए आखिर कौन-सा तरीका बेहतर है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, खाने के दौरान शरीर की मुद्रा आरामदायक और स्थिर होना महत्वपूर्ण है। फर्श पर पालथी मारकर बैठने से शरीर को सीधा रखने और पैरों की मांसपेशियों की सक्रियता में मदद मिल सकती है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए यह मुद्रा उपयुक्त नहीं होती। वहीं, कुर्सी पर बैठकर खाना सुविधाजनक है और बुजुर्गों या घुटने-कूल्हे की परेशानी वाले लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
असल में खाना कहां बैठकर खा रहे हैं, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि कैसे बैठ रहे हैं और कितना खा रहे हैं।
फर्श पर बैठकर भोजन करने के फायदे
- फर्श पर पालथी मारकर बैठने में शरीर को सीधा रखने की जरूरत पड़ती है।
- इससे कुछ लोगों में बेहतर पोश्चर बनाए रखने की आदत विकसित हो सकती है।
- इस मुद्रा में बैठते समय पैरों और कूल्हों की मांसपेशियां भी सक्रिय रहती हैं।
- फर्श पर बैठकर खाना खाते समय बार-बार थोड़ा आगे झुकना और फिर सीधा होना शरीर की हल्की गतिविधि बढ़ा सकता है।
कुर्सी पर बैठकर खाना क्यों सुविधाजनक है?
- टेबल-कुर्सी पर खाना अधिकांश लोगों के लिए आरामदायक और व्यावहारिक होता है।
- सही ऊंचाई की कुर्सी पर बैठने से पीठ को सहारा मिलता है।
- घुटनों पर अनावश्यक दबाव कम हो सकता है।
- बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या जिन लोगों को घुटने, कूल्हे या पीठ से जुड़ी समस्या है, उनके लिए फर्श पर बैठना मुश्किल हो सकता है।
- ऐसे लोगों को आरामदायक कुर्सी चुनना अधिक उपयुक्त हो सकता है।
शरीर के लिए कौन-सा तरीका बेहतर?
- अगर कोई व्यक्ति बिना दर्द या परेशानी के आराम से फर्श पर बैठ सकता है, तो पालथी मारकर खाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
- अगर फर्श पर बैठने से घुटने, कूल्हे या पीठ में दर्द होता है, तो सिर्फ परंपरा के कारण ऐसा करना जरूरी नहीं है।
सबसे जरूरी है कि खाते समय पीठ को यथासंभव सीधा रखें, शरीर को आराम दें और भोजन आराम से खाएं। लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना किसी भी तरीके को असुविधाजनक बना सकता है।
नोट: लगातार घुटने, कूल्हे या पीठ में दर्द रहता है तो अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना बेहतर है।