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दुर्गा अष्टमी 2026: अष्टमी पर छोटी कन्याओं की पूजा क्यों होती है? जानें इसके पीछे की मान्यता

Thu, 15 Oct 2026 05:38 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Durga Ashtami 2026: दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है? जानें इस परंपरा की धार्मिक मान्यता, हलवा-पूड़ी का महत्व और कन्या पूजन की आसान विधि।
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दुर्गा अष्टमी कन्या पूजन - फोटो : AI
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विस्तार
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Kanya Pujan 2026 : नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का विशेष अवसर माना जाता है। नौ दिनों तक भक्त माता रानी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं। इस दौरान दुर्गा अष्टमी का दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन अनेक घरों और मंदिरों में कन्या पूजन किया जाता है। इस परंपरा में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका स्वागत किया जाता है, उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इसके बाद दक्षिणा या उपहार देकर उनका सम्मान किया जाता है।

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लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है और इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं? दरअसल, कन्या पूजन को देवी शक्ति के सम्मान, पवित्रता, करुणा और नारी शक्ति की आराधना से जोड़कर देखा जाता है। आइए जानते हैं इस परंपरा का धार्मिक महत्व, इससे जुड़ी मान्यताएं और कन्या पूजन करने की सरल विधि।

कन्या पूजन क्यों किया जाता है?

 

 

 

 

हिंदू धार्मिक परंपरा में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। मां दुर्गा को आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है और छोटी कन्याओं में भी देवी के स्वरूप की कल्पना की जाती है। इसी आस्था के कारण नवरात्रि के अंत में कन्या पूजन किया जाता है।

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यह परंपरा भक्तों को याद दिलाती है कि स्त्री शक्ति का सम्मान करना भी देवी की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कन्या पूजन अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है। हालांकि, इसकी तिथि और विधि परिवार तथा क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

कन्या पूजन से जुड़ी धार्मिक मान्यता

प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार, छोटी कन्याएं मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं। कई परंपराओं में नौ कन्याओं को नवदुर्गा के नौ रूपों से जोड़कर पूजा जाता है। भक्त कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाते हैं और उन्हें देवी का स्वरूप मानकर सत्कार करते हैं।

कन्या पूजन की परंपरा का मुख्य संदेश श्रद्धा, सम्मान और सेवा है। इसे केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि बालिकाओं के प्रति आदर और स्नेह व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है।

कन्या पूजन में हलवा-पूड़ी और चने का महत्व

कन्या पूजन के दौरान हलवा, पूड़ी और काले चने का प्रसाद खिलाने की परंपरा कई उत्तर भारतीय परिवारों में प्रचलित है। इसके साथ फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवान भी दिए जा सकते हैं। भोजन तैयार करते समय स्वच्छता और सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए। कन्याओं को भोजन प्रेम और सम्मान के साथ परोसना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कन्या पूजन की आसान विधि

 

 

 

 

सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद कन्याओं को आदरपूर्वक आमंत्रित करके बैठाएं। परंपरा के अनुसार उनके पैर धोएं, तिलक लगाएं और उन्हें हलवा, पूड़ी, चने या अन्य सात्विक भोजन का प्रसाद दें। भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, फल या उपयोगी उपहार भेंट करें। इस दौरान बच्चों की सहजता, इच्छा और सम्मान का ध्यान रखना भी जरूरी है।

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