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Diwali Celebration 2024:दीपोत्सव के हर दिन का है खास महत्व, जानिए पांच दिवसीय त्योहार पर क्या-क्या होता है

Tue, 29 Oct 2024 08:27 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पांच दिन के इस त्योहार के हर दिन का अपना महत्व है। चलिए जानते हैं कि पहले दिन से पांचवें दिन तक का महत्व क्या है।
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दिवाली के पांत दिन के पर्व का महत्व - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Diwali Celebration 2024 : दिवाली पांच दिन का पर्व है, जिसका हर एक दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। पांच दिवसीय पर्व को दीपोत्सव कहा जाता है। पांच दिनों तक लगभग पूरे देश में उत्साह का माहौल होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपावली मनाते हैं। इस दिन लक्ष्मी गणेश जी की पूजा की जाती है। हालांकि इसकी शुरुआत दो दिन पहले धनतेरस से हो जाती है। जबकि समापन दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज से होता है। हर दिन की एक खास कथा है और अलग अलग तरह से मनाने की परंपरा। पांच दिन के इस त्योहार के हर दिन का अपना महत्व है। चलिए जानते हैं कि पहले दिन से पांचवें दिन तक का महत्व क्या है।

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पहला दिन - धनतेरस

दिवाली के पांच दिनों में सबसे पहले धनतेरस मनाई जाती है। ये कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इसलिए इसे धनत्रयोदशी भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन चिकित्सा और आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। भगवान धन्वंतरि ही समुद्र मंथन से अमृत कलश हाथ में लेकर बाहर आए थे। इसलिए धनतेरस को भगवान धन्वंतरि, ऐश्वर्य के स्वामी कुबेर जी की और माता लक्ष्मी का पूजन होता है।

दूसरा दिन- नरक चतुर्दशी
 
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस के नाम से भी जानते हैं। मान्यता अनुसार, इस दिन भगवान श्री कृष्ण जी ने नरकासुर का वध किया था और लगभग 16 हजार महिलाओं को नरकासुर की कैद से मुक्त किया था। इस दिन को छोटी दिवाली भी कहते हैं। नरक चतुर्दशी को यमराज जी के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। साथ ही इसे रूप चौदस भी कहते हैं।
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तीसरा दिन- दीपावली

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी और गणेश की पूजा की जाती है और घरों में रंगोली बनाई जाती है। घरों में पकवान बनाए जाते हैं और धूमधाम से इस त्योहार को मनाया जाता है।  

चौथा दिन- गोवर्धन पूजा
 
दिवाली के अगले दिन यानी कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस दिन गोवर्धन यानी गाय-बैल की पूजा की जाती है। इसके अलावा गोवर्धन पर्वत की पूजा और परिक्रमा भी लगाई जाती है।

पांचवा दिन- भाई दूज

गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज मनाई जाती है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर तिलक लगा कर उनकी आरती उतारती हैं और मुंह मीठा कराती हैं। इस दिन यम और यमुना की कथा भी सुनाई जाती है। रक्षाबंधन की तरह ये त्योहार भी भाई बहन के रिश्ते का प्रतीक है।

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