Lakshmi-Ganesh Idols : दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है। घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य लाने के लिए लोग लक्ष्मी गणेश की पूजा करते हैं। इसके लिए वह दिवाली के दिन नई मूर्तियों की स्थापना भी करते हैं।
धनतेरस पर गणेश-लक्ष्मी की नई मूर्तियां घर लाई जाती हैं, जिनकी पूजा दिवाली पर शुभ मुहुर्त में होती है। वहीं पुरानी मूर्तियों की जगह भगवान की नई मूर्तियां ले लेती हैं। दिवाली पर नए मूर्तियों की स्थापना की जाती है लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि पुरानी मूर्तियों का क्या होता है? दिवाली पर तो नई स्थापित मूर्तियों और पुरानी, दोनों मूर्तियों की पूजा की जा सकती है लेकिन उसके बाद मंदिर में नई मूर्तियों को स्थान मिल जाता है और पुरानी मूर्तियों को हटा दिया जाता है।
पूजित मूर्तियों को फेंकें नहीं
हिंदू परंपरा के अनुसार, पूजित मूर्तियों को कभी भी लापरवाही से नहीं फेंकना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है और यह धार्मिक दृष्टि से भी अनुचित है।
पुरानी मूर्तियों का करें विसर्जन
दिवाली के बाद अगर आपने नई मूर्तियों की स्थापना की है, तो पुरानी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक विदा करना चाहिए। सबसे अच्छा तरीका यह है कि उन्हें स्वच्छ नदी, तालाब या किसी पवित्र जल में विसर्जित किया जाए।
मूर्ति विसर्जन न कर पाएं तो क्या करें?
अगर ऐसा संभव न हो, तो घर के किसी पवित्र कोने या पौधों के पास, स्वच्छ कपड़े में लपेटकर रख सकते हैं।
मूर्तियों को मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी होनी चाहिए, ताकि पर्यावरण को हानि न पहुंचे। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों को पानी में नहीं डालना चाहिए। उन्हें सूखे कपड़े से साफ करके किसी मंदिर में दान करना या घर में सम्मानपूर्वक सजाकर रखना उचित है। याद रखें पूजा के दौरान जिन मूर्तियों को आपने श्रद्धा से स्थापित किया है, उन्हें उतनी ही श्रद्धा से विदा करना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा बरकरार रहती है।