Dhanteras Par Kiski Puja Hoti Hai: हिंदू धर्म में धनतेरस एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो दिवाली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है।धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व को खुशहाली, समृद्धि और स्वस्थ जीवन का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार धनतेरस या धनत्रयोदशी का पर्व 29 अक्तूबर 2024 को मनाया जा रहा है। धनतेरस धन, ऐश्वर्य और आरोग्य के देवी-देवताओं को समर्पित है। धनतेरस के मौके पर खरीदारी करना, खासकर नए वस्त्र, आभूषण और बर्तन आदि खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन धनतेरस मनाने की शुरुआत कैसे हुई, किसने की और धनतेरस के दिन किस भगवान की पूजा होती है, जैसे सवालों का जवाब चाहते हैं तो ये लेख आपके काम का है।
धनतेरस क्यों मनाते हैं?
धनतेरस का पर्व भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। इस तिथि को भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। भगवान धन्वन्तरि को आयुर्वेद के देवता और चिकित्सा के ज्ञाता माना जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि ही अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से धनतेरस का पर्व स्वस्थ जीवन, आरोग्य और दीर्घायु की कामना से मनाया जाता है।
धनतेरस पर किसकी पूजा होती है?
- धनतेरस का मुख्य संबंध भगवान धन्वंतरि से है जो चिकित्सा और आयुर्वेद के देवता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है।
- इसके अलावा धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दीपावली के साथ ही, धनतेरस में भी लक्ष्मी पूजन महत्वपूर्ण होता है।
- धनतेरस को धन और ऐश्वर्य के स्वामी कुबेर के पूजन की भी मान्यता है। कुबे भगवान को समृद्धि और संपत्ति का संरक्षक माना जाता है। इस दिन कुबेर जी की पूजा से आर्थिक उन्नति और सुख समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
धनतेरस से जुड़ी मान्यताएं
खरीदारी
धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन, या अन्य धातुओं से बनी वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से लोग नए बर्तन, आभूषण और गृह सामग्री खरीदते हैं ताकि उनके जीवन में सौभाग्य और खुशहाली बनी रहे।
दीपक जलाना
धनतेरस के मौके पर विशेष रूप से दीपक जलाने की परंपरा है। इस दिन घर का कोई भी कोना अंधकारमय नहीं रहने दिया जाता और कोने कोने में दीपक जलाया जाता है। शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज का दीपक जलाया जाता है।