- बच्चे को नाम और फोन नंबर याद कराएं
आप छोटी उम्र से ही बच्चे को अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम, हमेशा चालू रहने वाला मोबाइल नंबर और अपने शहर व मोहल्ले का नाम याद करवाएं। छोटे बच्चों के लिए नंबर याद करना मुश्किल होता है, इसलिए रोजाना खेल-खेल में इसका अभ्यास कराएं। अगर बच्चा बहुत छोटा है, तो उसके कपड़ों या किसी सुरक्षित पहचान-पत्र में अभिभावक का फोन नंबर रखें और बताएं कि इसका इस्तेमाल कब किया जाना है।
- भीड़ में अलग हो जाए तो क्या करें?
बच्चे को समझाएं कि अगर वह कभी माता-पिता, शिक्षक या परिवार के किसी सदस्य से अलग हो जाए, तो घबराकर इधर-उधर न भागे। इसकी जगह वह, वहीं किसी सुरक्षित और भीड़ वाली जगह पर रुककर मदद मांगे। उसे बताएं कि पुलिसकर्मी, सुरक्षा गार्ड, छोटे बच्चों वाले परिवार से मदद ले। सबसे जरूरी वह मदद मांगने वाले किसी अनजान व्यक्ति के साथ अकेले कहीं न जाए और बिना बताए वाहन में न बैठें। आप उसे कहें कि वह मदद मांगने वाले से कहे कि ‘आप इसी जगह मेरे माता-पिता को बुला दो।’
- खतरा महसूस हो तो जोर से मदद मांगे
बच्चे को समझाएं कि अगर कोई उसे जबरदस्ती कहीं ले जाने की कोशिश करे या वह किसी व्यक्ति के साथ असुरक्षित महसूस करे, तो मदद के लिए जोर से पुकारे। घर पर ऐसी स्थिति की छोटी-सी प्रेक्टिस भी कराएं, जैसे ‘बचाओ’ या ‘मदद करो’ कहकर आस-पास के लोगों का ध्यान खींचे। इस स्थिति में क्या करना है, इसका अभ्यास अगर आप पहले से कराएंगी, तो वास्तविक परिस्थिति में वह तुरंत प्रतिक्रिया देकर सुरक्षित रह सकेगा।
- माता-पिता भी रखें इन बातों का ध्यान
सबसे जरूरी बात कि आपको केवल बच्चे के भीड़ में खोने की स्थिति आने का इंतजार नहीं करना है, बल्कि ऐसी स्थिति बने ही नहीं इसकी भी तैयारी करनी है। उसे सिखाएं की अकेले कहीं नहीं जाना है, हमेशा अपनों का हाथ पकड़कर चलना है, किसी अनजान के हाथ से कुछ नहीं लेना है, कोई पास बुलाने का इशारा करता है, तो माता-पिता को तुरंत बताना है आदि। याद रखें माता-पिता की थोड़ी-सी तैयारी और बच्चे की छोटी-सी समझ मुश्किल समय में बहुत काम आ सकती है।