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Chhatrapati Sambhaji Maharaj Jayanti: छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती आज, जानें इनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें

Wed, 14 May 2025 09:46 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

संभाजी की जयंती पर उन्हें याद करना, नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा देना और उनकी शिक्षाओं को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस लेख में जानिए छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन से जुड़ी रोचक बातें।
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संभाजी की जयंती - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Chhatrapati Sambhaji Maharaj Jayanti : छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती हर साल 14 मई को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में भी उनकी जयंती 14 मई 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। यह दिन मराठा साम्राज्य के वीर और साहसी योद्धा संभाजी महाराज के जन्म की स्मृति में श्रद्धा और गर्व से भरा होता है। छत्रपति संभाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता, विद्वता और वीरता का प्रतीक हैं। उनकी जयंती पर उन्हें याद करना, नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा देना और उनकी शिक्षाओं को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस लेख में जानिए छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन से जुड़ी रोचक बातें।

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छत्रपति संभाजी महाराज का परिवार और शिक्षा

संभाजी महाराज का जन्म 14 मई 1657 को महाराष्ट्र के पुरंदर किले में हुआ था। वे महान मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज और सईबाई के पुत्र थे। संभाजी महाराज ने बचपन से ही संस्कृत, मराठी, फारसी और हिंदी भाषा में दक्षता प्राप्त की थी। वे एक विद्वान लेखक और कवि भी थे। उन्होंने बुद्धिभूषण नामक ग्रंथ की रचना की थी।

संभाजी का मुगलों से संघर्ष

वे 1681 में मराठा साम्राज्य के दूसरे छत्रपति बने। उन्होंने मुगलों, सिद्धी, पोर्तुगीज और अन्य दुश्मनों से वीरतापूर्वक लड़ाई की और मराठा साम्राज्य की रक्षा की। औरंगजेब की विशाल सेना से लड़ते हुए भी संभाजी महाराज ने कई वर्षों तक मराठा भूमि की रक्षा की। उनके नेतृत्व में मराठा सेना ने कई बार मुगलों को पीछे हटने पर मजबूर किया। 1689 में उन्हें मुगलों ने पकड़ लिया। औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करने का आदेश दिया, लेकिन संभाजी महाराज ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें क्रूरता से शहीद कर दिया गया।
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बलिदान की मिसाल

उनकी शहादत आज भी धर्म, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की मिसाल मानी जाती है। वे भारत के इतिहास में उन वीर योद्धाओं में शामिल हैं जिनका नाम हमेशा श्रद्धा से लिया जाएगा।

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