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Baisakhi 2026 Date: कब और क्यों मनाई जाती है बैसाखी? जानिए इसका धार्मिक महत्व

Mon, 13 Apr 2026 12:35 PM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Baisakhi 2026: बैसाखी 2026 कब है? जानें तारीख, इतिहास, महत्व और इसे कैसे मनाते हैं। सिख धर्म और फसल कटाई से जुड़ी पूरी जानकारी हिंदी में।
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बैसाखी कब है - फोटो : AI
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विस्तार
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Baisakhi Kab Hai 2026: बैसाखी भारत के सबसे महत्वपूर्ण और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे विशेष रूप से पंजाब और उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। साल 2026 में बैसाखी 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह पर्व रबी फसल की कटाई की खुशी का प्रतीक है। सिख समुदाय के लिए इसका गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। 

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बैसाखी का दिन सिख धर्म में इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यह घटना सिख इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है, जिसने समुदाय को एक नई पहचान और शक्ति दी।

इसके अलावा, बैसाखी किसानों के लिए भी बेहद खास होती है क्योंकि इस समय गेहूं की फसल पककर तैयार हो जाती है। लोग इस दिन भगवान का धन्यवाद करते हैं और खुशियां मनाते हैं। आइए जानते हैं बैसाखी 2026 की तारीख, इतिहास, महत्व और इसे मनाने के तरीके के बारे में विस्तार से बताएंगे।


बैसाखी 2026 कब है?

हर साल मेष संक्रांति तिथि पर बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। इस बार बैसाखी का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य प्रातः 09 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत में बैसाखी का पर्व विशेष रूप से मनाते हैं। इस दिन गुरुद्वारा में कीर्तन, लंगर होते हैं। 

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बैसाखी का इतिहास 

बैसाखी का इतिहास 1699 से जुड़ा है, जब गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस दिन सिखों को एक नई पहचान मिली और उन्हें साहस, समानता और धर्म की रक्षा के लिए प्रेरित किया गया। यह घटना सिख धर्म के इतिहास में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई।


बैसाखी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

बैसाखी सिखों के लिए नववर्ष की तरह है। इस दिन लोग गुरुद्वारों में जाकर अरदास करते हैं और सेवा करते हैं। साथ ही, किसानों के लिए यह फसल कटाई का पर्व है, जो उनकी मेहनत का फल दर्शाता है। यह त्योहार खुशी, समृद्धि और एकता का प्रतीक है।


बैसाखी क्यों मनाई जाती है?

बैसाखी मनाने के पीछे दो मुख्य कारण हैं, धार्मिक और कृषि। धार्मिक रूप से यह खालसा पंथ की स्थापना का दिन है, जबकि कृषि के दृष्टिकोण से यह फसल तैयार होने की खुशी का पर्व है। इस दिन लोग ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और नई शुरुआत का स्वागत करते हैं।


बैसाखी कैसे मनाते हैं? 

इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर गुरुद्वारों में जाते हैं, जहां कीर्तन और अरदास होती है। स्वर्ण मंदिर जैसे प्रमुख गुरुद्वारों में विशेष आयोजन होते हैं। इसके बाद लंगर का आयोजन किया जाता है और लोग भांगड़ा-गिद्धा कर इस दिन को उत्साह से मनाते हैं।


बैसाखी का आधुनिक महत्व

आज के समय में भी बैसाखी का महत्व कम नहीं हुआ है। यह त्योहार हमें हमारी संस्कृति, परंपरा और मेहनत की अहमियत याद दिलाता है। साथ ही, यह समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देता है।

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