राजनीतिक करियर
1936 में बाबू जगजीवन राम 28 साल की उम्र में बिहार विधान परिषद के सदस्य नामित हुए। 1937 में जब कांग्रेस सरकार बनी तो शिक्षा और विकास मंत्रालय में संसदीय सचिव के रूप में जगजीवन राम को नियुक्त किया गया। बाद में 1938 में पूरे मंत्रिमंडल के साथ उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
जगजीवन राम 1940 से 1977 तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रहे। 1948 से 1977 तक कांग्रेस कार्य समिति में भी शामिल रहे। 1950 से 1977 तक केंद्रीय संसदीय बोर्ड में रहे। 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान बाबू जगजीवन राम ही देश के रक्षा मंत्री थे। हरित क्रांति के दौरान वह देश के कृषि मंत्री के तौर पर कार्यरत थे।
इतना ही नहीं जगजीवन राम 50 साल तक सांसद रहे और इस उपलब्धि के कारण उनके नाम पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना है।
इंदिरा गांधी के इमरजेंसी के बाद जगजीवन राम और कांग्रेस के बीच दूरी आने लगी और उन्होंने पार्टी छोड़कर कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी नाम से नई पार्टी बनाई। बाद में जयप्रकाश नारायण के कहने पर उन्होंने जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा। वह प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी में थे लेकिन मोरारजी देसाई को पीएम बना दिया गया और उन्हें कैबिनेट का हिस्सा बनाते हुए उप प्रधानमंत्री का पद मिला।