उत्तर प्रदेश का आगाज मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास के सत्र से हुआ। उन्होंने सुप्रभात लखनऊ से कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं अमर उजाला का हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहता हूं। यह मेरा चौथा संवाद है। उन्होंने कहा कि जीवन में आप कुछ भी करें, कोई न कोई जरूर नाराज होगा। सभी को खुश करना असंभव है। शांति और सुखी जीवन का सबसे बड़ा सूत्र है कि लोगों को खुश करना बंद कर दें।
लोगों को खुश करने वाले न बनें
दुख हमेशा साथ रहेगा, सुख आता जाता रहता है। उन्होंने बताया कि एक बार उनके लाइव वीडियो पर लोग उनको गाली दे रहे थे क्योंकि वो अंग्रेजी में बोल रहे थे। तब मैंने समझा कि कुछ भी करिए, आप सबको खुश नहीं कर सकते।इस बात को उन्होंने एक गाने के जरिये बताया, कि
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...
जिंदगी के रिश्तों में पता करें कि कौन सामने है, कौन साथ में है। सफलता अकेली होती है। जीवन में ऊपर जाने पर नंबर, उपलब्धियां, शोहरत-दौलत होती है, लेकिन नीचे उतरने पर रिश्ते पता चलते हैं। उनमें सुकून होता है, सच्चाई होती है।
उन्होंने कहा कि डूबना अच्छा होता है, डूबते-डूबते टूटना अच्छा नहीं होता। दूसरों के लिए जीना अच्छा है, लेकिन खुद के लिए जीना न भूलें। हमें किसी की जरूरत नहीं, इसे अहम कहते हैं। सभी को हमारी जरूरत है, इसे वहम कहते हैं।
जीवन का मंत्र कविता से दिया गया:
एक बचपन का जमाना था, जिसमें खुशियों का खजाना था। चाहत चांद को पाने की थी, पर दिल तितली का दीवाना था। खबर ना थी सुबह की, ना शाम का ठिकाना था। थक कर आना स्कूल से, पर खेलने भी जाना था।
सोशल मीडिया ने एक तरफ देश को महत्वाकांक्षी बना दिया है, दूसरी तरफ अवसाद से ग्रस्त कर दिया है। दूसरों के बगीचे में देखते-देखते अपनी घास सूख जाती है। अपनी घास पर पानी दो, तितलियां अपने आप आ जाएंगी।
चिंता और चिता का फर्क
गौर गोपाल दास ने मंच से पूछा कि क्या आपको कोई चिंता है या किसी समस्या से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि हर कोई किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है। कोई अपने पति या पत्नी से परेशान है, कोई करियर की समस्या से।
इसका एक आसान तरीका है कि अपनी जिंदगी की परेशानी को सामने रखें। पति-पत्नी को एक दूसरे से दिक्कत है तो अपने फोन के वॉलपेपर पर साथी की फोटो लगाएं और उसे देखें। समस्या को सुलझाने से ज्यादा उसे समझना जरूरी है।
हर किसी को समस्या सॉल्विंग चाहिए, लेकिन चिंता में लोग ज्यादा रहते हैं। चिंता और चिता में ज्यादा फर्क नहीं है।