लेखक वरुण ग्रोवर की एक कविता 'हम कागज नहीं दिखाएंगे' सोशल मीडिया पर बेहद चर्चित हुई और इसे संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ प्रतिरोध की सशक्त आवाज मानकर युवाओं ने काफी शेयर किया। लेकिन वरुण ग्रोवर की इसी कविता को अब करारे जवाब मिल रहे हैं और इसके विरोध में कई कविताएं सोशल मीडिया पर चर्चा बटोर रही हैं और खूब वायरल हो रही हैं। इनमें से एक कविता के अल्फाज हैं, 'क्यों कागज नहीं दिखाओगे, क्या मन में चोर छुपा है'। ये कविता तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है।
जहां वरुण ग्रोवर की कविता सरकार के फैसले का विरोध कर रही थी वहीं यह कविता सरकार के निर्णय का स्वागत करती है और कहती है, 'अपने हो तो फिर डर कैसा? हाथों में ये पत्थर कैसा '। वहीं, एक और कविता है जो वरुण ग्रोवर की कविता के विरोध में वायरल हुई थी जिसे ऊर्वी सिंह ने लिखा है जो कि लखनऊ के एक कॉलेज में अंग्रेजी की सहायक अध्यापिका हैं। अपनी कविता में उन्होंने लिखा था, 'वो कागज नहीं दिखाएंगे, अपने स्टैंडअप पर आपसे आई कार्ड मंगवाएंगे। वो डर को चारों और फैलाएंगे, वो कागज नहीं दिखाएंगे।'
ये कविताएं दो विचारधाराओं के बीच अपनी सहमति और असहमति दर्ज कराती हैं। रचनात्मकता के जरिए राजनीति में हस्तक्षेप करती हैं। सरकार के फैसले का विरोध करती हैं तो सरकार को अपना समर्थन भी देती हैं। आइए वरुण ग्रोवर के जवाब के तौर पर वायरल हो रही कविता के अल्फाज जानते हैं....।
क्यों कागज नहीं दिखाओगे?
क्यों कागज नहीं दिखाओगे?
क्या मन में कोई चोर छुपा
या मनमानी का तौर चुना
अपने हो तो फिर डर कैसा
हाथों में ये पत्थर कैसा
अपना ही देश जलाओगे
क्यों कागज नहीं दिखाओगे ?
ये कागज अपनी शान है
मेरी तेरी पहचान है
ये कागज पाया गांधी से
अशफाक भगतसिंह बिस्मिल से
ये कागज अपनी अस्मत है
आज़ादी की ये नेमत है
बना परचम लहराएंगे
हम कागज़ सभी दिखाएंगे
आज़ादी तुमको प्यारी है
पर इसमें भी मनमानी है
जो थे बिछड़े,कितने तड़पे
थोड़ी सी आज़ादी को तरसे
ये कागज उनको दे ताकत
ये कागज उनको दे इज्जत
उन सबको गले लगाएंगे
हम कागज सभी दिखाएंगे
शरणागत वत्सल बन जाएंगे
हम कागज सभी दिखाएंगे
देश का मान बढ़ाएंगे
हम कागज सभी दिखाएंगे
हम पत्थर नहीं चलाएंगे
हम कागज सभी दिखाएंगे
गौरतलब है कि इससे पहले वरुण ग्रोवर ने जो कविता पढ़ी थी उसे कांग्रेस के नेता शशि थरूर और सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने भी अपने ट्विटर पर साझा किया था। अब दक्षिणपंथी और सरकार को सीएए पर समर्थन देने वाले लोग दूसरी कविता को जवाब के तौर पर तेजी से साझा कर रहे हैं।