ध्यान और सार्वभौमिक भाईचारे के बिना, जो आध्यात्मिकता का सारभूत तत्व है, धर्म केवल एक बाहरी कवच के रूप में रहता है- सांकेतिक तस्वीर
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इस ग्रह पर केवल एक प्रकार का फल, एक प्रकार के लोग या एक प्रकार का पशु नहीं है। अतः हमें आत्मा को एक में सीमित नहीं करना है। आइए उन सभी का आदर, सम्मान और प्रेम करके सृजन की विविधता का आनंद लें। हम अक्सर 'धार्मिक सहिष्णुता' शब्द का उपयोग करते रहे हैं।
मुझे लगता है कि ये शब्द अब व्यर्थ हो गया है। आप केवल उसी को सहन करते हैं जिसे आप प्रेम नहीं करते हैं। समय आ गया है कि एक-दूसरे के धर्मों को अपने धर्म की तरह प्रेम करें।
एक धर्म सिर्फ इसलिए महान नहीं है क्योंकि वह मेरा है; वह क्या है इस कारण बहुत अच्छा है। यह समझ जब उन सभी में निहित होगी जो आध्यात्मिक और धार्मिक प्रकाश में लोगों का नेतृत्व करते हैं, तब यही हमारी सुंदर दुनिया में चल रही कट्टरता को समाप्त कर देगी।
जीवन के बारे में एक व्यापक दृष्टि को शामिल करने के लिए हमें अपने लोगों को हर दूसरे धर्म और संस्कृति के बारे में थोड़ा शिक्षित करने की आवश्यकता है। ध्यान और सार्वभौमिक भाईचारे के बिना, जो आध्यात्मिकता का सारभूत तत्व है, धर्म केवल एक बाहरी कवच के रूप में रहता है।
हमें केवल इतना करना है कि हम शांति के भंडार की खोज करें जो कि हम हैं। शांतिपूर्ण लोग एक शांतिपूर्ण, सुंदर दुनिया का निर्माण करेंगे जहां विविधता, दयालुता और सेवा का सम्मान किया जाता है।
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