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मदर्स डे : बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां - निदा फ़ाज़ली

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                        
                                            बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां
याद आती है! चौका बासन चिमटा फुकनी जैसी मां

बांस की खर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे
आधी सोई आधी जागी थकी दो-पहरी जैसी मां

चिड़ियों की चहकार में गूंजे राधा मोहन अल...और पढ़ें
31 minutes ago

नाउम्मीदी

Bhawana Sharma

Mere Alfaz
                                                        
                                            ज़माने की बेपरवाही में अपने अरमान जलें तो क्या
मंज़िल नहीं कोई फिर चलें तो क्या ना चलें तो क्या
जब बेड़ियां पेट की जकड़ लें अपने हाथ तो फिर
दिल में ख्वाब पलें तो क्या ना पलें तो क्या

लाल की याद में मां का वक्त थम ह...और पढ़ें
2 hours ago

पहला कदम

Bhawana Sharma

Mere Alfaz
                                                        
                                            डर होता है मन में सबके दुबका किसी कोने में
हिम्मत के साए के पीछे
इसपे पार पाना मुश्किल है हिम्मत आड़े आती है
लगता है मानो डर
है ही नहीं मन में
फिर हम खुद को
बेवकूफ़ बनाते हैं
गरजकर शेर की तरह
शि...और पढ़ें
2 hours ago

मदर्स डे - मां के लिए कहे शायरों के अशआर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                        
                                            चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है
- मुनव्वर राना


कहो क्या मेहरबाँ ना-मेहरबाँ तक़दीर होती है
कहा माँ की दुआओं में बड़ी तासीर होती है
- अंजुम ख़लीक़...और पढ़ें
2 hours ago

जैसा समझो वैसा जीवन

Anonymous User

Mere Alfaz
                                                        
                                            कितने काव्य पढ़े जीवन पर,
कितने काव्य अभी आयेंगे
जीवन की परिभाषा को सब
अपने ढंग से समझाएंगे।
कोई कहता संघर्षों का
दूजा नाम लिखो तो, जीवन
किसी की कविता में जीवन है,
नव पुष्पों का खिलता उपवन।
जीवन...और पढ़ें
2 hours ago

फकत उसकी ही मुट्ठी में ये जमाना होगा rp

Anonymous User

Mere Alfaz
                                                        
                                            फकत उसकी ही मुट्ठी में ये जमाना होगा
फलसफा जिंदगी जीने का जिसने जाना होगा
ख्वाहिशें चांद सी रखने से भला क्या होगा
कोई चिराग जमीं पर भी जलाना होगा
हाल पूछेंगे हारने पर कुछ लोग मगर
जीत का हौसला फिर खुद ही जुटाना होगा...और पढ़ें
2 hours ago

ओ मेरे धर्म !

Anonymous User

Mere Alfaz
                                                        
                                            ओ मेरे धर्म!
क्या सत्य ही
मेरे अस्तित्व का आधार हो तुम?
दीवारों की प्रतिच्छाया में बैठे
अज्ञात सृष्टा को समर्पित
आभार हो तुम?

ओ मेरे धर्म!

अगणित पग बढ़ते हैं
उसी मार्ग पर
...और पढ़ें
2 hours ago

कविताएं लिखी नहीं जातीं

Anonymous User

Mere Alfaz
                                                        
                                            कविताएं
लिखी नहीं जातीं
पिरोयी जातीं हैं
शब्द-शब्द चुनकर
भावों के धागे में
तभी तो
हर लिखावट
कविता नहीं होती

प्रथम पंक्ति से
अंतिम पड़ाव तक
बहती जाती है
कविता,
...और पढ़ें
2 hours ago

वर्षा

Anonymous User

Mere Alfaz
                                                        
                                            झंकारों की मधुर ध्वनि में
निहित है इक कोमल सी हर्षा
नवल तृप्ति जब द्रवित हो बरसे
तो,कहलाती रिमझिम वर्षा।

ग्रीष्म ऋतु से आहत धरती
की,जगती जब सघन पिपासा
ठोस दरारें भरने को,रहती
बस थोड़े जल की आशा...और पढ़ें
2 hours ago

"कुछ नया..... "

Anonymous User

Mere Alfaz
                                                        
                                            कितनी बार
साल की 'एक' तारीख
रंगीन बिजलियों के तारों से
हवाई रोशनी के अंगारों से
रोशन हुई है।
लोग कहते हैं
नया साल आ गया है।
दिन तो वही हैं
धूप और धुंध से भरे दिन
ख्वाहिशों के रंग...और पढ़ें
2 hours ago
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