ये दुनिया एक जंगल है

DrJayati Rajput Updated Wed, 07 Mar 2018 04:55 PM IST
ये दुनिया एक जंगल है फैला जंगल राज यहां हर तरफ धमाकों का गर्जन सासें हैं मोहताज यहां बंजर जमीन बारूद बिछी बोई जाती बंदूक यहां न उगते ज्वार बाजरा उगती है बस भूख लाल लाल नदियों का पानी झीलों में तेजाब कमल नहीं खिलते इनमें खिलता है आतंकवाद महक रही हो फूलों से ऐसी न कोई साख यहां पत्ते पत्ते पर जमी हुई बस विस्फोटों की राख यहां बंटवारे की खिंची लकीरें छीना झपटी का है विवाद न देशप्रेम न मानवता बस एक धर्म अलगाववाद परवाह न किसी को है कल की न शान्ति अमन की कोई बात बस मारकाट और लूटपाट इन्सानी खूं में रंगे हाथ है एक हकीकत शेष यही बाकी सब कुछ बर्बाद यहां सहमा बचपन सूनी आंखें मातम का साम्राज्य यहां आबाद घरों को फूंक यहां श्मशान बनाये जाते हैं लाशों के अम्बारों पर यहां जश्न मनाये जाते हैं रहने को घरबार नहीं कपडों की जगह कफन मिलते हैं मौत यहां सस्ती बिकती जीने को लोग तरसते हैं अंधकार ही अंधकार दहशत का आलम सारा धमकाने की होड़ लगी किसने कितनों को मारा शान्ति, अहिंसा, सदाचार के दिखते न आसार यहां जाने वो दिन कब आयेगा जब आपस में होगा प्यार यहां हर तरफ धमाकों का गर्जन सांसें हैं मोहताज यहां... - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
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