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दोस्ती: दूसरों के लिए जीने का हौसला देते 21 शेर

Sat, 15 Jul 2017 11:52 AM IST
काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
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आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूं मैं
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जैसे हर शय में किसी शय की कमी पाता हूं मैं। 
जिगर मुरादाबादी

ये कहां की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता। 
मिर्ज़ा ग़ालिब

ये फ़ित्ना आदमी की ख़ाना-वीरानी को क्या कम है
हुए तुम दोस्त जिस के दुश्मन उस का आसमां क्यूं हो। 
मिर्ज़ा ग़ालिब

तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो 'फ़राज़'
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला। 
अहमद फ़राज़  

इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था 'शेफ़्ता'
ये क्या किया कि दोस्त को दुश्मन बना दिया। 
मुस्तफ़ा ख़ां शेफ़्ता

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएं
क्यूं न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएं। 
अहमद फ़राज़

वो नहीं आएगा, लेकिन मुझको,
उसके वादे पे भरोसा क्यों है।
मौज रामपुरी 

दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए। 
अब्दुल हमीद अदम

दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त
दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से। 
हफ़ीज़ होशियारपुरी

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब
मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं। 
हफ़ीज़ जालंधरी

दुश्मनों की जफ़ा का ख़ौफ़ नहीं
दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं। 
हफ़ीज़ बनारसी 

इसी शहर में कई साल से मिरे कुछ क़रीबी अज़ीज़ हैं
उन्हें मेरी कोई ख़बर नहीं मुझे उन का कोई पता नहीं। 
बशीर बद्र  

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ
कीजे मुझे क़ुबूल मेरी हर कमी के साथ। 
वसीम बरेलवी  

ये कहां की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता। 
मिर्ज़ा ग़ालिब

जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए!
हमें तो ना ज़मीन, ना सितारे, ना चांद, ना रात चाहिए।
 गालिब 

ज़िंदगी के उदास लम्हों में
बेवफ़ा दोस्त याद आते हैं। 
अज्ञात

दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी
'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए। 
अख़्तर शीरानी

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों। 
बशीर बद्र

वक़्त-ए-नज़्ज़ारा न रो कहते थे ऐ चश्म तुझे
शिद्दत-ए-गिर्या से ले ख़ाक न सूझा, देखा। 
ख़्वाजा हसन 'हसन'

कुछ यूं लगता है तिरे साथ ही गुज़रा वो भी
हम ने जो वक़्त तिरे साथ गुज़ारा ही नहीं। 
मख़मूर सईदी

किस-किस तरह से मुझको न रुसवा किया गया
दुश्मन-दोस्त सभी कहते हैं , बदला नहीं हूं मैं।
शहरयार 
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