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UPESSC: गंभीर अनियमितताओं के चलते यूपीएसईसी सहायक प्रोफेसर परीक्षा रद्द, यूपी सरकार का आदेश

Thu, 08 Jan 2026 10:28 AM IST
शाहीन परवीन जॉब्स डेस्क, अमर उजाला

सार

UPESSC Assistant Professor: उत्तर प्रदेश में सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने के गंभीर आरोपों के चलते सरकार ने इसे रद्द कर दिया है। जांच के तहत अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और मामले की आगे की कार्रवाई जारी है।
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यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग, UPESSC - फोटो : X(@upesscprayagraj)
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विस्तार
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UPESSC: उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा पिछले वर्ष आयोजित सहायक प्रोफेसर परीक्षा को रद्द करने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक सहित गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

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एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया, जिन्होंने अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की खुफिया जानकारी मिलने के बाद विशेष कार्य बल (STF) को गोपनीय जांच का आदेश दिया था।

एसटीएफ ने सहायक प्रोफेसर परीक्षा फर्जीवाड़ा गिरोह का किया पर्दाफाश 

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, एसटीएफ ने 16 और 17 अप्रैल को आयोजित सहायक प्रोफेसर परीक्षा के दौरान फर्जी प्रश्नपत्र तैयार करने और उम्मीदवारों की नकल करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया।

सूचनाओं के आधार पर, एसटीएफ ने परीक्षा में हेराफेरी और अवैध वसूली के आरोप में 20 अप्रैल को तीन आरोपियों - महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल - को गिरफ्तार किया।

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लखनऊ के विभूतिखंड पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

जांच में निष्पक्षता और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष को इस्तीफा देने के लिए कहा गया था, क्योंकि आरोपियों में से एक, महबूब अली, उनके गोपनीय सहायक के रूप में काम कर रहा था।

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फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

यूपीईएससी की अध्यक्ष प्रोफेसर कीर्ति पांडे ने पिछले साल सितंबर में इस्तीफा दे दिया था।

बयान के अनुसार, पूछताछ के दौरान महबूब अली ने कथित तौर पर कबूल किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्रों तक पहुंच बनाई थी और उन्हें पैसे के बदले उम्मीदवारों को मुहैया कराया था। एसटीएफ ने कहा कि विस्तृत जांच और डेटा विश्लेषण के माध्यम से इस कबूलनामे की पुष्टि हुई है।

सभी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, बयान में कहा गया है कि यूपीईएससी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा आयोजित की जाए।

सरकार ने कहा कि यह निर्णय वास्तविक उम्मीदवारों के हितों और भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और परीक्षा संबंधी कदाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।  
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