आपको यह सुनकर कैसा लगेगा कि किसी को कॉफी चखने के लिए नौकरी पर रखा गया है। लेकिन यह कहानी ऐसी ही एक महिला की है जिन्हें कॉफी चखकर उसकी गुणवत्ता जांचने के लिए पैसे मिलते हैं। सुनलिनी मेनन भारत की पहली ऐसी महिला हैं जो इंडियन कॉफी बोर्ड में कॉफी चखने की नौकरी करती थीं। इंडियन कॉफी बोर्ड में अपनी नौकरी के दौरान उन्हें लैंगिक भेदभाव के खिलाफ लडाई भी लडनी पडी थी। चालीस सालों के बाद भी उनकी जीभ के टेस्ट बड शानदार तरीके से काम करते हैं।
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आज वे विदेशी बाजारों के लिए 'प्रीमियम कॉफी' बनाती हैं। वे इसे 'स्पेशल कॉफी' के तौर पर मानने से इंकार करती हैं। सुनलिनी मेनन ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मैं प्रीमियम शब्द के इस्तेमाल में ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हूं। अगर मैं स्पेशल कहती हूं तो इस बात का जोखिम हो सकता है कि उसमें कुछ खास न हो। लेकिन जब मैं प्रीमियम कहती हूं तो इसका मतलब है कि यह थोडा हटकर है।" अब वे कॉफी लैब लिमिटेड में मुख्य कार्यकारी के तौर पर काम करती हैं। कॉफीलैब लिमिटेड की स्थापना 1996 में हुई थी। सुनलिनी कॉफी बोर्ड से अपनी इच्छा से रिटायरमेंट लेने के बाद कॉफी लैब लिमिटेड से जुड गई थीं।
विदेश जाकर सीखी काॅफी की बारीकियां
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सुनलिनी मेनन अब भी किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दे रही हैं जिससे किसानों को उत्पादन बढाने में मदद मिलती है। कॉफी का उत्पादन करने वालों को उनकी सलाह के बाद तीन गुना ज्यादा कीमत मिलती है। वो कहती हैं, "हां उन्हें ब्रांडेड कॉफी की ज्यादा कीमत मिलती है। मसलन अगर बाजार में एक पाउंड कॉफी के लिए दो अमरीकी डॉलर मिल रहे हैं तो बहुत संभव हैं उन्हें इसके छह या पांच डॉलर मिलेंगे।" कॉफी बोर्ड में सहायक टेस्टर (कॉफी चखकर बताने की नौकरी) के लिए उन्हें छोडकर सभी पुरुष ही उनके साथ प्रतियोगिता में शामिल थे।
उन्होंने नौकरी के दौरान न सिर्फ लैंगिक भेदभाव के खिलाफ लडाई लडी बल्कि इस क्षेत्र में जानकारी की कमी से भी उन्हें जूझना पडा। जीवन के प्रति "मुझे सीखना चाहिए, मुझे सबसे आगे होना चाहिए" जैसे उनके दृष्टिकोण की वजह से उन्हें बोर्ड की ओर से विदेश जाकर कॉफी को परखने की बारीकियों को सीखने का भी मौका मिला। इस प्रशिक्षण ने स्वाद के आधार पर कॉफी परखने का विभाग बनाने में मदद की। इसके बाद कॉफी की मात्रा और गुणवत्ता का मूल्यांकन शुरू हो गया और इसी आधार पर किसानों को मिलने वाले दाम भी तय होने लगे। इससे गुस्साए किसानों को सुनलिनी के इस तरीके को समझने में बहुत समय लग गया।
कॉफी की खुशबू मेरे लिए पहली सबसे महत्वपूर्ण जानकारी
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सालों के अनुभव के बाद वो उस मुकाम पर पहुंची है कि कॉफी की पहली चुस्की उन्हें बहुत सारी जानकारियां दे देती हैं। उनका कहना है, "कॉफी की खुशबू मेरे लिए पहली सबसे महत्वपूर्ण जानकारी है। अच्छा स्वाद पकडने वाले में सूंघने की तीक्ष्ण योग्यता का होनी जरूरी है।" वो बताती हैं, "सबसे पहले तो मुझे कॉफी की खुशबू की वजह से ही कॉफी के बीज के बारे में पता चल जाता है लेकिन उसे पक्का करने के लिए मुझे उसे चखना पडता है।"
सुनलिनी मानती हैं कि 'यह एक मुश्किल काम है लेकिन बहुत दिलचस्प है। और खासकर जब आप सही नतीजे पर पहुंचते हैं तो यह और भी दिलचस्प हो जाता है।' इससे उन्हें वाकई में बडी खुशी मिलती है जब कोई किसान उनके पास आकर कहता है, 'आप कैसे जान गईं कि मैंने कॉफी को सूखी जगह पर ड्रेक नहीं किया।' इस पेशे में बने रहने के लिए क्या-क्या करना होता है? वो कहती हैं, "आपको अच्छी सेहत बनाए रखनी होती है। आपको अक्सर जुकाम नहीं होना चाहिए। यह काम एलर्जी के मरीजों के लिए नहीं है। आपको अच्छी नींद लेने की जरूरत है।"
वो आगे कहती हैं, "शराब पीने से आपके तालू खुरदुरे हो जाएंगे इसलिए शराब से परहेज करना होता है। तालू को सिगरेट से भी बचाना पडता है। तंबाकू खाना बिल्कुल मना है। गर्म मसालेदार खाना नहीं खा सकती हूँ और मैं एक बार फिर से कह रही हूं कि मुझे पूरे अनुशासन के साथ सोने के समय का ख्याल रखना पडता है।"
इस अनुशासन की वजह से ही कुछ महीने पहले उन्हें अमरीका में हुए टेस्ट में 110 में से 106 अंक मिले थे और उन्हें Q ग्रेड हासिल हुआ था। इस क्षेत्र में आने वाले नए लोगों के लिए उनका संदेश बहुत साफ है, "अगर आप जल्दी पैसा कमाने की सोच रहे हैं तो यह पेशा आपके लिए नहीं है। इसमें आपकी सलाह मानने में लोगों को कई साल लग जाते हैं।"