गति और नियंत्रण दोनों साथ चलें
तेजी का मतलब सिर्फ जल्दी काम करना नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखते हुए आगे बढ़ना है। यानी विकास ऐसा हो, जिसमें सिस्टम पर दबाव न पड़े और काम सुचारु रूप से चलता रहे। इसके लिए जरूरी है कि पहले से ही मजबूत व्यवस्था-जैसे ऑटोमेटेड टेस्टिंग और मॉनिटरिंग तैयार हो, ताकि काम सुरक्षित और स्थिर रहे। गति और नियंत्रण दोनों साथ-साथ चलने चाहिए, ताकि न तो गलतियां बढ़ें और न ही प्रगति रुके। इसी संतुलन से लंबे समय तक स्थिर और सफल विकास संभव हो पाता है।
सही लोगों को जोड़ें
जब कोई संगठन बहुत तेजी से बढ़ता है, तो उसकी पहचान और कार्यसंस्कृति पर असर पड़ सकता है। इसलिए टीम का विस्तार करते समय सिर्फ संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसे लोगों को जोड़ना जरूरी है, जो संगठन के मूल्यों को समझें और उन्हें बनाए रखें। विकास के साथ अपनी संस्कृति को संभालकर रखना ही लंबे समय तक सफलता और स्थिरता की कुंजी है, क्योंकि मजबूत संस्कृति ही टीम को एकजुट रखती है और संगठन को सही दिशा में आगे बढ़ाती है।