खाने-पीने की चीजें हों या होम-इम्प्रूवमेंट की अन्य वस्तुएं, अगर पैकिंग अच्छी है, तो लोग खुद-ब-खुद इसकी तरफ खिंचे चले आते हैं। आप भी जब बाजार जाते होंगे, तो आपका भी सबसे पहला ध्यान आकर्षक पैकेटों पर ही जाता होगा।
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क्या कभी आपने जानने की कोशिश की है कि इन पैकेटों को सुंदर बनाता कौन है? दरअसल, बाजार में मौजूद जितने भी डिब्बाबंद प्रोडक्ट हैं, उनकी पैकेजिंग का श्रेय काफी हद तक कंपनी के ‘पैकेजिंग टेक्नोलॉजी’ को जाता है, जो अपनी रचनात्मकता से पैकेट्स की डिजाइन करते हैं।
अब तो कंपनियां भी समझने लगी हैं कि मार्केट में पैठ जमाना है, तो उत्पाद की गुणवत्ता के साथ-साथ उसे आकर्षक पैकिंग की भी जरूरत है। इसलिए आज सभी ब्रांड अपने उत्पादों की पैकिंग पर खूब ध्यान दे रहे हैं। यदि आपको भी अच्छे ग्राफिक्स की समझ है, पैकिंग के क्षेत्र में रुचि है और नए आइडियाज हैं, तो तेजी से बढ़ते इस उद्योग में रोजगार की कोई कमी नहीं है।
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जानिए, आखिर है क्या पैकेजिंग?
किसी उत्पाद को कागज में लपेटकर उसे पैक कर देना ही पैकेजिंग नहीं है। उत्पाद की पैकिंग ऐसी होनी चाहिए, जिससे वह उत्पाद आकर्षक लगे और उपभोक्ता की नजर में आते ही उसे तुरंत पसंद आ जाए।
इसके अलावा पैकिंग पर उत्पाद से संबंधित जरूरी जानकारी भी होनी चाहिए और पैकिंग के बाद उत्पाद की गुणवत्ता भी बनी रहनी चाहिए। इसलिए पैकिंग पेपर को ग्राफिक्स आर्ट, डिजाइनिंग और प्रिंटिंग की मदद से आकर्षक लुक दिया जाता है।
इस तरह देखें, तो पैकेजिंग का काम विविधताओं भरा है, जिसमें उत्पाद निर्माता और डिजाइन डिपार्टमेंट से तालमेल कर पैकिंग का डिजाइन तय किया जाता है। इस क्षेत्र में भविष्य तलाशने वाले छात्रों की साइंस और मैथ पर अच्छी कमांड होने के साथ-साथ आईटी की भी जानकारी होनी चाहिए।
अच्छी कम्युनिकेशन स्किल होने से खुद को स्थापित करने के ज्यादा अवसर मिलते हैं। इस क्षेत्र में कॅरियर तलाश रहे अभ्यर्थियों से कंपनियां यह अपेक्षा रखती हैं कि उन्हें इस क्षेत्र की व्यवहारिक नॉलेज हो, ताकि वह इस क्षेत्र में बजट और चुनौतियों को ठीक से समझने में सक्षम हों।
12वीं पास छात्रों के लिए हैं ये कोर्स
इस समय भारतीय पैकेजिंग इंडस्ट्री तेजी से फल-फूल भी रही है, ऐसे में प्रशिक्षित लोगों की मांग बढ़ेगी। दूसरी तरफ विदेशों से भी भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए डिमांड आ रही है यानी पैकेजिंग इंडस्ट्री संभावनाओं से भरपूर है।
इस क्षेत्र में बीटेक को छोड़ दें, तो ज्यादातर कोर्स पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट स्तर के हैं। बीटेक में चार साल, तो डिप्लोमा कोर्स में दो साल की पढ़ाई होती है। वहीं इससे जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स तीन से छह माह के भी हैं। किसी भी स्ट्रीम से ग्रेजुएट छात्र इस क्षेत्र में सर्टिफिकेट कोर्स की पढ़ाई कर सकते हैं।
वहीं साइंस विषय में ग्रेजुएट छात्र पैकेजिंग तकनीक के पीजी डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। इस क्षेत्र में कुछ संस्थान पत्राचार से भी कोर्स कराते हैं। 10+2 में साइंस से पास छात्र इस कोर्स के बीटेक पाठ्यक्रम में एडमिशन ले सकते हैं।
पैकेजिंग टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के अंतर्गत छात्रों को विशेष रूप से पैकिंग उद्योग में इस्तेमाल होने वाला मैटीरियल, पैकिंग तकनीक, गुणवत्ता, प्रबंधन, इस उद्योग से जुड़े पर्यावरण संरक्षण के नियम और कानून आदि के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है।
पैकेजिंग प्रोफेशनल्स को सबसे ज्यादा मौका प्रोडक्शन, मार्केटिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट आदि क्षेत्रों में मिलता है। एक अनुमान के मुताबिक आज देश में लगभग तीन से साढ़े तीन हजार प्रोफेशनल्स की सालाना मांग है।
जहां तक बात सैलरी की है, तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिस्पर्धा में आने से पैकेजिंग इंडस्ट्री में अच्छे सैलरी पैकेज मिलने लगे हैं। मैन्युफेक्चरिंग यूनिट्स, मल्टीनेशनल कंपनियों व फार्मास्यूटिकल कंपनियां प्रोफेशनल्स को अपने यहां अच्छे पैकेज पर नियुक्त करती हैं।
किसी प्रतिष्ठित संस्थान से बीटेक या पीजी डिप्लोमा करने के बाद छात्रों को शुरुआत में 20-25 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी आसानी से मिल जाती है। अनुभव बढ़ने के साथ-साथ सैलरी में भी इजाफा होता है।
तीन-चार साल के अनुभव के बाद इस क्षेत्र में तनख्वाह 30-35 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। वहीं सर्टिफिकेट कोर्स किए अभ्यर्थियों को शुरुआत में 10-15 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिलती है।
प्रमुख संस्थान
:- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकैजिंग, मुंबई www.iip-in.com (दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद और चेन्नई में भी शाखाएं)
:- एसआईईएस स्कूल ऑफ पैकेजिंग टेक्नोलॉजी सेंटर, नवी मुंबई www.siessop.edu.in