छोटे विकल्प तैयार रखें
आपके पास हमेशा कोई बड़ा या उपयुक्त विकल्प होना जरूरी नहीं होता, बल्कि कई बार छोटे-छोटे विकल्प भी आपकी स्थिति को मजबूत बना देते हैं। अगर आप पूरी तरह किसी एक व्यक्ति या संस्था पर निर्भर हैं, तो एक छोटी-सी वैकल्पिक व्यवस्था भी आपको सहारा दे सकती है। इससे सामने वाले को संकेत मिलता है कि आप पूरी तरह उस पर निर्भर नहीं हैं, और यही बात उसे अपनी शर्तों में लचीलापन दिखाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
डर को हावी न होने दें
जब हमें लगता है कि हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है, तो हम डर की वजह से जल्दबाजी में गलत निर्णय ले लेते हैं। ऐसे समय में जरूरी है कि आप शांत रहें; हो सकता है कि सामने वाला भी किसी न किसी रूप में आप पर निर्भर हो। यदि आप केवल अपनी कमजोरियों पर ध्यान देंगे, तो सही निर्णय नहीं ले पाएंगे। इसलिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है।
तुरंत 'हां' या 'ना' न कहें
इस दौरान तुरंत 'हां' या 'ना' कहना जरूरी नहीं होता। कई बार समय लेना ही सबसे प्रभावी रणनीति होती है। आप सामने वाले से सोचने के लिए समय मांग सकते हैं और इस स्थिति का शांतिपूर्वक विश्लेषण कर सकते हैं। साथ ही, आप ऐसे छोटे-छोटे कदम भी उठा सकते हैं, जो बिना पूर्ण सहमति के ही आपकी स्थिति को मजबूत बनाएं। यह प्रक्रिया आपको धीरे-धीरे एक बेहतर और मजबूत स्थिति में पहुंचाने में मदद कर सकती है।
- कई बार छोटे-छोटे विकल्प भी आपकी स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।
- ऐसी स्थिति में आप शांत रहें और यह समझें कि सामने वाला भी आप पर किसी न किसी रूप में निर्भर हो सकता है।
- तुरंत 'हां' या 'ना' कहने के बजाय स्थिति का विश्लेषण करें।
- अपनी बात को सहज भाव से रखें, ताकि टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो।
बात को सहज भाव से रखें
इसमें संवाद का तरीका बेहद महत्वपूर्ण होता है। सामने वाले से धमकी भरे अंदाज में बात करने के बजाय अपनी बात को शांत और सहज तरीके से रखना बेहतर होता है, ताकि टकराव की स्थिति न बने और बातचीत नियंत्रण में रहे। आप यह कह सकते हैं कि इस परिस्थिति में आपको अन्य विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है। साथ ही, अपनी बात को तर्कसंगत ढंग से भी रखा जा सकता है।