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नीति आयोग के प्रमुख ने बढ़ती बेरोजगारी को लेकर कही ये बात, बताई क्या है सरकार की नीति

Thu, 04 Mar 2021 05:50 PM IST
देवेश शर्मा जॉब डेस्क, अमर उजाला
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Rajiv Kumar Niti Aayog Vice Chairman
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देश में बढ़ती जनसंख्या के साथ ही युवाओं में बेरोजगारी की दर भी बढ़ रही है। बीते साल कोरोना महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा था। लाखों लोग बेरोजगार हो गए। कई अच्छे रोजगार देने वाली कंपनियां भी डूब गई या लॉकडाउन में लंबे समय तक बंद रहने के कारण बंद हो गईं। बाजार में महंगाई की मार भी बढ़ गई है। इस बीच, सरकार की नीतियों पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। ऐसा ही एक सवाल है बढ़ती बेरोजगारी को रोकने का। भारत सरकार के सबसे बड़े थिंक टैंक और योजना सलाहकार के तौर पर काम करने वाले नीति आयोग के प्रमुख डॉ राजीव कुमार ने एक साक्षात्कार में बेरोजगारी को लेकर सरकारी नीतियों के बारे में बड़ी साफगोई से अपनी बात रखी है। 

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देश में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार ने कहा कि यह समस्या ऐसी है जिसे कभी भी किसी भी सरकार के द्वारा सॉल्व नहीं की जा सकती है। क्योंकि रोजगार का जो मसला है वह बिल्कुल हर तरह से आपकी इकोनॉमी से आपकी रेट ऑफ ग्रोथ से, आपके इन्वेस्टमेंट्स से जुड़ा हुआ है और जब तक वह बेहतर नहीं होता है, तब तक रोजगार भी बेहतर होना नामुमकिन हैं, असंभव है। इसके लिए सरकार ने अपना जो रुख अपनाया है जो कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा है कि वे जो प्राइवेट सेक्टर हैं, जो हमारे प्राइवेट इन्वेस्टर हैं उनसे अपेक्षा कर रहे हैं वे आगे आएं और रोजगार सृजन में अपना इन्वेस्टमेंट बढ़ाएं। उस इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने के लिए जो कुछ भी सरकार को करना है। जैसे सुविधाएं देने के लिए, उसका प्रमोशन करने के लिए, उन सबको करने के लिए हम न सिर्फ राजी है बल्कि हम वह सब कुछ करने को तत्पर हैं। 

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वहीं, एजुकेशन सेक्टर, में जो नए बच्चे पढ़कर निकल रहे हैं, इंजीनियरिंग से आ रहे हैं, मेडिकल सेक्टर से आ रहे हैं उनके लिए तो कुछ करना पड़ेगा संबंधी सवाल पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष कहते हैं कि सरकार ज्यादा से ज्यादा क्या कर सकती है। सरकार उनको किसी तरह का कुछ बेरोजगारी लाभ या भत्ता दे दे किसी किस्म का या उनको कोई टेंपरेरी एक तरह से जैसा बहुत से लोग कहते हैं कि यूनिवर्सल बेसिक इनकम ऑफ जैसा कुछ शुरू कर दे लेकिन वह जो सारी चीजें उससे रोजगार तो नहीं बढ़ेगा न, मैं फिर से इस बात को दोहराउंगा कि इसका कोई टेंपरेरी सॉल्यूशन नहीं है। और अगर टेंपरेरी सॉल्यूशन बनाने कि कोशिश की तो हो सकता है कि जो बेसिक काम करना है शायद वह न हो पाए।
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