अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में अपने साथ ब्लूटूथ, मोबाइल फोन या अन्य किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के साथ प्रवेश न करें, इस पर निगरानी की जिम्मेदारी भी आयोग ने एजेंसी को सौंप दी है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि केंद्र निर्धारण नीति में बदलाव के कारण अब प्रदेश के सभी जनपदों में परीक्षा केंद्र बनाए जा रहे हैं और आयोग में स्टाफ की संख्या सीमित है, ऐसे में आयोग के प्रतिनिधियों के लिए हर केंद्र तक पहुंच पाना संभव नहीं है। यही वजह है कि आयोग ने परीक्षा केंद्रों व परीक्षार्थियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक की मदद ली है और इसके लिए एजेंसी की जिम्मेदारी तय की है।
गड़बड़ी की संख्या के हिसाब से बढ़ेगा जुर्माना
जुर्माना भी अभ्यर्थियों की संख्या के हिसाब से बढ़ता जाएगा। उदाहरण के तौर पर परीक्षा केंद्र में अगर किसी एक अभ्यर्थी के पास ब्लूटूध पाया जाता है या बायोमीट्रिक पहचान में कोई गलती होती है तो एजेंसी से केंद्र में उपस्थित अभ्यर्थियों की संख्या के लिए निर्धारित भुगतान राशि का 10 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। यदि दो अभ्यर्थी पकड़े जाते हैं तो 20 गुना जुर्माना व तीन अभ्यर्थियों के पकड़े जाने पर 30 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। इसी कम में जुर्माना राशि बढ़ती जाएगी। ज्यादा गड़बड़ी होने पर संबंधित एजेंसी को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। वहीं, अभ्यर्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
एजेंसी पर लगा तीन लाख रुपये का जुर्माना
आयोग के सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों हुई परीक्षा में एक अभ्यर्थी के पास ब्लूटूथ मिलने पर केंद्र में उपस्थित कुल परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से संबंधित एजेंसी पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। परीक्षा केंद्र में बायोमीट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी पूरी तरह से एजेंसी को सौंपी जा चुकी है। नई व्यवस्था के तहत एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि बायोमीट्रिक डिवाइस सही तरीके से काम करे, सभी परीक्षार्थियों का सत्यापन हो और कोई भी अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में ब्लूटूध या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर प्रवेश न करें।
आयोग ने प्रति अभ्यर्थी भुगतान की राशि तय कर रखी है। एजेंसी को परीक्षा केंद्र में उपस्थित कुल परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से धनराशि का भुगतान किया जाता है, लेकिन यदि केंद्र में बायोमीट्रिक सत्यापन में गड़चड़ी मिली तो एजेंसी से इस धनराशि का दस गुना जुर्माना वसूला जाएगा।