UP Board Result Date 2020: दवा व्यापार के क्षेत्र में मार्केटिंग और मैनेजमेंट में अगर करियर बनाना चाहते हैं, तो जरूरी है चिकित्सा क्षेत्र की उम्दा जानकारी का होना और उससे भी अहम है मैनेजमेंट, चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे कार्यों को अंजाम दिया जा सके इसी के मद्देनजर कई यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में फार्मा मैनेजमेंट व फार्मा मार्केटिंग के पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
नेचर ऑफ वर्क:
- इस क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति को मानव शरीर व दवा में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक तत्वों की जानकारी का होना भी बेहद जरूरी है। दवा की मार्केटिंग में सीधे-सीधे उपभोक्ताओं से संपर्क न करके डॉक्टरों को संतुष्ट किया जाता है, क्योंकि डॉक्टरों की सलाह पर ही उपभोक्ता दवा खरीदते हैं। इसलिए इस काम को अंजाम देने के लिए व्यक्ति में कम्युनिकेशन स्किल्स के साथ-साथ द्विभाषा (अंग्रेजी तथा क्षेत्रीय भाषा) की जानकारी का होना भी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही दवाइयों के इस्तेमाल से जुड़े विपरीत असर को पहचानना, उसकी पुष्टि करना, असर को मापना भी होता है, ताकि दवाइयों को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सके।
योग्यता/पाठ्यक्रम:
- फार्मा बिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए और बीबीए, स्नातकोत्तर डिप्लोमा इन फार्मास्यूटिकल एवं हेल्थकेयर मार्केटिंग, डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग एवं पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग के कोर्स यूनिवर्सिटी एवं कॉलेज में शामिल किए गए हैं। इसके अलावा बकायदा कुछ संस्थानों में फार्मा बिजनेस मार्केटिंग के पाठ्यक्रम की अवधि छह माह से लेकर एक वर्ष तक की होती है। इनमें प्रवेश के लिए अनिवार्य योग्यता 12वीं (विज्ञान) उत्तीर्ण होना जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की अवधि एक वर्ष होती है। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम योग्यता बीएससी, बी फार्मा निर्धारित है। 12वीं (गणित और जीव विज्ञान) के बाद फार्मा बीबीए (फार्मा बिजनेस) में दाखिला लिया जा सकता है। यह तीन वर्षीय स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम है।
अवसर:
- बीबीए इन फार्मा तथा डिप्लोमा कोर्स के बाद छात्रों की मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, प्रोडक्ट एग्जीक्यूटिव, मेडिकल रिप्रेजेटेंटिव, बिजनेस एग्जीक्यूटिव आदि के रूप में नियुक्ति होती है। एमबीए पाठ्क्रम के बाद छात्रों को एरिया मैनेजर, सर्किल मैनेजर, प्रोडक्ट मैनेजर, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर, ब्रांड मैनेजर या मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में बहाली हो सकती है। इस क्षेत्र में काम करने वाली कई प्रमुख कंपनियां जैसे रैनबैक्सी, ग्लेक्सो, सन फार्मा, फाइजर, सिप्ला, निकोलस पिरामल आदि बडी तादाद में रोजगार प्रदान करती हैं। वैसे भी रोजगार मुहैया कराने में फार्मा सेक्टर बहुत आगे है।
- सामान्य तौर पर शुरूआती वेतन 10 से 20 हजार रुपये तक है, लेकिन तजुर्बे के आधार पर आमदनी में इजाफा होता है। कुछ साल का अनुभव हासिल करने के बाद 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी आसानी से हासिल की जा सकती है। हिन्दुस्तान से बाहर भारतीय कर्मियों की खूब डिमांड है, अगर आपने किसी फार्मास्यूटिकल कंपनी में दो या तीन साल का अनुभव हासिल कर लिया है, तो वेतन लाखों में मिल सकता है।
प्रमुख संस्थान:
- नेशनल इंस्ट्रीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल
- इंस्ट्रीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पुणे