अभ्यर्थियों ने परीक्षा कराने वाले एडुक्विटी वेंडर पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के पास टेंडर था, जो अब दूसरी कंपनी को दिया गया है। प्रदर्शन में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रौनक खत्री ने कहा कि परीक्षा का वेंडर काली सूची में शामिल कंपनी को दिया गया है।
जब छात्रों ने इन गड़बड़ियों के खिलाफ शांतिपूर्वक जंतर-मंतर और CGO कॉम्प्लेक्स के बाहर प्रदर्शन किया, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। इससे अभ्यर्थियों में और भी रोष फैल गया और वे अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी क्या कह रहे हैं?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे परीक्षार्थियों और शिक्षकों ने एसएससी और परीक्षा संचालक एडुक्विटी वेंडर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा केंद्र कर्नाटक दे दिया गया, जबकि हमने कानपुर चुना था। वहां पहुंचकर पता चला कि परीक्षा रद्द हो गई। कंप्यूटर माउस काम नहीं कर रहे थे और जब सवाल उठाए तो बाउंसर बुला लिए गए।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
- परीक्षा वेंडर की समीक्षा और पुनः चयन हो।
- रद्द की गई परीक्षाओं को फिर से आयोजित किया जाए।
- दोषियों पर कार्रवाई हो।
- पुलिस लाठीचार्ज की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
सोशल मीडिया पर मिला समर्थन
इस मुद्दे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर भी जोर पकड़ लिया है। #SSCSystemSudharo, #SSCMisManagement और #SSCVendorFailure जैसे हैशटैग्स ट्रेंड कर रहे हैं। हजारों छात्रों और कोचिंग संस्थानों ने इन मांगों को समर्थन दिया है। एनएसयूआई अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी नहीं है, बल्कि युवाओं को चुप कराने की कोशिश है। अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन देशभर में फैलेगा।