इस मामले में बिहार सरकार की तरफ से दलील दी गई थी कि पटना हाई कोर्ट के आदेश से सरकार पर करीब 9500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। केंद्र ने भी इस पर बिहार सरकार का समर्थन किया था। कोर्ट में दिए गए अपने 36 पन्नों के हलफनामे में केंद्र ने कहा था कि नियोजित शिक्षक समान वेतन की श्रेणी में नहीं आते। अगर एक राज्य की मांग मानी गई तो दूसरे राज्यों से भी मांग उठेगी। इससे सरकार पर हर साल करीब 36,998 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अभी नियोजित शिक्षकों को 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। समान वेतन लागू होने पर इन्हें 35 से 44 हजार रुपये तक सैलरी मिलती।
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