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UPSC: 2014 में मोटापे के कारण बाहर हुए उम्मीदवार का फिर से हो मेडिकल टेस्ट; सुप्रीम कोर्ट का यूपीएसस को आदेश

Fri, 02 Aug 2024 09:16 PM IST
आकाश कुमार जॉब्स डेस्क, अमर उजाला

सार

Supreme Court: करीब एक दशक पहले सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने वाले एक व्यक्ति को मोटापे के कारण सिविल सेवक बनने के लिए "अस्थायी रूप से अयोग्य" घोषित कर दिया गया था। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को आदेश दिया कि वह उसकी मेडिकल जांच फिर से कराए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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UPSC: शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को रक्षित शिवम प्रकाश के लिए फिर से शारीरिक फिटनेस टेस्ट कराने का निर्देश दिया। संविधान का अनुच्छेद 142 शीर्ष अदालत को "किसी भी मामले या मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक कोई भी डिक्री या आदेश पारित करने का अधिकार देता है।"

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रक्षित शिवम प्रकाश ने 2014 में आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में 93वां स्थान प्राप्त किया था, लेकिन "अस्वीकार्य" बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के कारण बाहर हो गया था। उम्मीदवार का बीएमआई 31.75 था, जो निर्धारित मानक 30 से अधिक है। उसे "अस्थायी रूप से अयोग्य" घोषित कर दिया गया और परिणामस्वरूप उसे नौकरी नहीं दी गई। वह 14 जुलाई, 2015 को निर्धारित दूसरे मेडिकल टेस्ट में भाग नहीं ले सके।

इस शक्ति का प्रयोग करते हुए, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और पंकज मिथल की पीठ ने कहा, "मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद, हम सीमित राहत प्रदान करना उचित समझते हैं। यह प्रतिवादियों (यूपीएससी और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग सहित अन्य) को 14 जुलाई, 2015 को आयोजित होने वाले पुन: मेडिकल टेस्ट को पुनर्निर्धारित करने का निर्देश देना होगा, जिसे याचिकाकर्ता दुर्भाग्य से चूक गया।"
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हालांकि, पीठ ने यूपीएससी को 2014 की परीक्षा के अन्य समान उम्मीदवारों के समान सभी परिणामी लाभों के साथ व्यक्ति को सेवा आवंटित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने अपने फैसले में कहा, "हम सर्वप्रथम याचिकाकर्ता द्वारा सिविल सेवा परीक्षा, 2014 के विरुद्ध सेवा आवंटन तथा परिणामी लाभों के लिए की गई प्रार्थना (सेवा आवंटन) को अस्वीकार करते हैं। इस तथ्य पर विचार करते हुए कि मूल पुन: चिकित्सा परीक्षा 2015 में होनी थी तथा लगभग एक दशक बीत चुका है, हम निर्देश देते हैं कि यदि याचिकाकर्ता चिकित्सा पुन: परीक्षा में उत्तीर्ण होता है, तो वह न तो 2014 बैच में नियुक्ति का दावा करेगा, न ही वह उस बैच में वरिष्ठता का हकदार होगा, जिसमें उसे नियुक्त किया जा सकता था।"

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रकाश चिकित्सा परीक्षा उत्तीर्ण कर लेता है, तो उसकी सेवाएं नियुक्ति की तिथि से प्रारंभ होंगी। न्यायालय ने कहा, "यह एक असाधारण मामला है, जिसमें हमने पूर्ण न्याय करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग किया है, तथा इस प्रकार, वर्तमान निर्णय को किसी भी मामले में मिसाल नहीं माना जाएगा।"

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