फर्जी प्रमाण-पत्र पर सख्त कार्रवाई
दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 89 और 91 के तहत धोखाधड़ी करने वालों को दंडित किया जाता है।
- धारा 89 (धोखाधड़ी/नियम उल्लंघन): पहली बार उल्लंघन पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना, और बाद के उल्लंघनों पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना।
- धारा 91 (धोखाधड़ी से लाभ प्राप्त करने का प्रयास): दो साल तक की जेल और 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना।
आरएएस-2023 में शुरू हुआ पुनः सत्यापन
आयोग ने आरएएस भर्ती-2023 के साक्षात्कार में ही संदिग्ध दिव्यांग प्रमाण-पत्रों को लेकर सख्त रुख अपनाया और पहली बार मेडिकल जांच का प्रावधान शुरू किया था। इसके चलते कई अभ्यर्थियों ने मेडिकल जांच से दूरी बना ली थी या प्रार्थना-पत्र देकर अपनी श्रेणी को दिव्यांग से सामान्य/अन्य श्रेणी में बदलने की मांग की थी।
फर्जी प्रमाण-पत्रों पर कड़ी कार्रवाई
जांच में पता चला कि कुछ अभ्यर्थी पहले से ही गलत प्रमाण-पत्रों के आधार पर सरकारी सेवाओं में कार्यरत थे। आयोग ने ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों और फर्जी प्रमाण-पत्र जारी करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध निदेशालय चिकित्सा विभाग को पत्र भेजा। वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में इस कड़ी को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि केवल वास्तविक रूप से पात्र अभ्यर्थियों को ही लाभ मिल सके।
524 अभ्यर्थियों को किया गया डिबार
आयोग ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र, छद्म डिग्री और अन्य दस्तावेजों में जालसाजी करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
अब तक 524 संदिग्ध और अपात्र अभ्यर्थियों को आयोग की भर्ती परीक्षाओं से डिबार किया जा चुका है। इनमें से 415 अभ्यर्थियों को आजीवन, जबकि शेष 109 अभ्यर्थियों को 1 से 5 वर्ष तक के लिए डिबार किया गया है।