एक प्रश्न का नहीं हुआ था मूल्यांकन
बाद में दत्ता को पता चला कि संपत्ति के कानून के पेपर में उनके एक प्रश्न का उत्तर मूल्यांकन के दौरान बिना मूल्यांकन के छोड़ दिया गया था, जबकि अन्य प्रश्नों में दिए गए अंक उनकी अपेक्षा से कम थे।
इसके बाद उन्होंने संपत्ति के कानून के पेपर में अपनी उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने ओडिशा के तीन प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों द्वारा उनकी उत्तर पुस्तिका का स्वतंत्र मूल्यांकन करने का निर्देश दिया।
मूल्यांकन के बाद भी अर्हता के लिए पर्याप्त नहीं थे अंक
समीक्षा में पुष्टि हुई कि उनके एक उत्तर को अनदेखा कर दिया गया था, और बाद में उस प्रश्न के अंक दिए गए। हालांकि, उसके बाद भी, अगले चरण के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए कुल अंक अपर्याप्त थे।
न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू और चित्तरंजन दाश की खंडपीठ ने मूल्यांकन के दौरान हुई त्रुटि के कारण हुई परेशानी को स्वीकार किया। पीठ ने कहा, "इस मामले को आगे बढ़ाने में याचिकाकर्ता द्वारा झेले गए मानसिक आघात और वित्तीय बोझ को देखते हुए, हम मुआवजे के रूप में 1 लाख रुपये देना उचित समझते हैं।"
60 दिनों में भीतर करना होगा भुगतान
यह राशि ओडिशा लोक सेवा आयोग द्वारा सोमवार को दिए गए फैसले के 60 दिनों के भीतर भुगतान की जाएगी। पीठ ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं करियर को आकार देती हैं और इसमें वर्षों की कठोर तैयारी, वित्तीय निवेश और व्यक्तिगत बलिदान शामिल होते हैं।
अदालत ने कहा, इसलिए, भविष्य में ऐसी चूक को रोकने के लिए मूल्यांकन प्रक्रियाओं में "उच्चतम स्तर की जांच और गुणवत्ता नियंत्रण उपायों" की आवश्यकता है।