महज अकादमिक डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का सपना अब भूल जाइए। बीए, एमए जैसी डिग्रियों के सहारे कोई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तो क्या चपरासी भी नहीं बन पाएगा। सरकार की योजना सरकारी सेवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा को अनिवार्य बनाने की है। इस योजना के तहत पांच साल बाद बिना किसी हुनर की डिग्री के कोई व्यक्ति सरकारी पद के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएगा।
दरअसल, नेशनल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मुताबिक ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के कारण अगले पांच वर्षों में ढांचागत संरचना, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक जैसे क्षेत्रों में 15 करोड़ हुनरमंद लोगों की आवश्यकता होगी।
निजी के साथ सरकारी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में हुनरमंद लोगों की जरूरत होगी। दोनों क्षेत्रों में हुनरमंद लोगों की बड़ी संख्या में जरूरत के मद्देनजर देश भर के सभी प्रशिक्षण संस्थाओं को हाल ही में गठित ‘नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क’ (एनएसक्यूएफ) से खुद को संबद्ध करना अनिवार्य कर दिया गया है।
खास बात यह है कि एनएसक्यूएफ से जुड़ी डिग्रियां दुनिया के 100 देशों में मान्य होंगी। उल्लेखनीय है कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के कारण हुनरमंद लोगों की व्यापक जरूरत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही नई सरकार ने 24 मंत्रालयों में अलग-अलग चल रहे कौशल विकास के कार्यक्रमों के लिए अलग से मंत्रालय का गठन किया था।