पिछले नियमों की तुलना में बदलाव
2022 के नियमों के अनुसार, गैर-शिक्षण डॉक्टरों को 330 बिस्तरों वाले गैर-शिक्षण अस्पताल में दो साल तक काम करने के बाद सहायक प्रोफेसर बनने की अनुमति दी गई थी, लेकिन यह तब लागू होता था जब वह अस्पताल मेडिकल कॉलेज में बदला गया हो। नए मसौदे में बिस्तरों की संख्या घटाकर 220 कर दी गई है और कार्यकाल चार साल कर दिया गया है।
प्रशिक्षण और शोध की अनिवार्यता
सहायक प्रोफेसर बनने के लिए डॉक्टरों को बायोमेडिकल रिसर्च (बीसीबीआर) में बेसिक कोर्स पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, केवल उन्हीं शोधपत्रों पर विचार किया जाएगा, जो मेडलाइन, पबमेड, स्कोपस जैसी प्रतिष्ठित निर्देशिकाओं में प्रकाशित हैं।
डिप्लोमा धारकों और वरिष्ठ परामर्शदाताओं को राहत
8 जून, 2017 से पहले वरिष्ठ रेजिडेंट के रूप में नियुक्त डिप्लोमा धारकों को सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता दी गई है, बशर्ते वे लगातार उसी संस्थान में काम कर रहे हों। इसके अलावा, एनबीईएमएस के मानकों के तहत पीजी शिक्षक के रूप में मान्यता प्राप्त डॉक्टर, जिन्होंने तीन साल का अनुभव पूरा किया है, वे प्रोफेसर बनने के योग्य होंगे।
स्नातकोत्तर मार्गदर्शक बनने के मानदंड
किसी मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर और उससे ऊपर के पद पर कुल पांच साल का अनुभव रखने वाले शिक्षक संबंधित विषय में स्नातकोत्तर मार्गदर्शक बन सकते हैं। सुपर स्पेशियलिटी विषय के लिए यह अनुभव तीन साल का होना चाहिए।
गैर-मेडिकल स्नातकों के लिए पुरानी व्यवस्था जारी
मसौदे में यह भी कहा गया है कि एमएससी और पीएचडी धारक गैर-मेडिकल स्नातक संक्रमणकालीन अवधि के दौरान मेडिकल छात्रों को एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री और फिजियोलॉजी पढ़ा सकते हैं। यह प्रावधान अगले दो वर्षों तक जारी रहेगा। एनएमसी ने इन प्रस्तावित बदलावों पर जनता और संबंधित हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।