विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं?
इस विधेयक का नाम कर्नाटक लोक सेवा आयोग (कार्य संचालन और अतिरिक्त कार्य) (संशोधन) विधेयक, 2025 है। यह 1959 के कानून में संशोधन करता है और निम्नलिखित बदलाव लाता है:
- अब आयोग की बैठक के लिए 50% सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिसमें अध्यक्ष भी शामिल होंगे।
- उम्मीदवारों के साक्षात्कार के लिए किसी भी एक सदस्य को अधिकृत किया जा सकता है।
- परीक्षा नियंत्रक और संयुक्त परीक्षा नियंत्रक जैसे शब्दों को विधायी रूप से परिभाषित किया गया है।
सरकार ने क्या कहा?
विधानसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने कहा कि यह एक छोटा संशोधन है और सरकार भविष्य में और सुधार लाने पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा, "हम केपीएससी को सुधारने के लिए तत्काल उपाय कर रहे हैं। यह कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं है, लेकिन इसे ठीक करने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं।"
विधेयक को जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा, "अब तक सरकार को केपीएससी से परामर्श लेकर नियमों में बदलाव करना पड़ता था, जिससे सुधार लागू करने में देरी होती थी। अब यह बाध्यता हटा दी गई है, जिससे सरकार केपीएससी के लिए नियमों को स्वतंत्र रूप से तय कर सकेगी।"
इसके अलावा, परिपत्र (सर्कुलेशन) के माध्यम से फैसले लेने की प्रक्रिया भी हटाई गई है ताकि निर्णयों में देरी न हो।
विपक्ष की क्या राय है?
चर्चा के दौरान, विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने केपीएससी में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए बड़े सुधारों की मांग की।
- बीजेपी विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि केपीएससी में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है और चयन प्रक्रिया में खामियां हैं।
- उन्होंने सुझाव दिया कि महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोग का अध्ययन करने के लिए एक सदन समिति का गठन किया जाए ताकि सुधारों को बेहतर बनाया जा सके।
- विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, "केपीएससी अब ऐसे चरण में है, जहां इसे बड़े सुधारों की जरूरत है, लेकिन सरकार इसे सिर्फ छोटी-मोटी दवाइयां देकर सुधारने की कोशिश कर रही है।"
- उन्होंने केपीएससी में यूपीएससी जैसी पारदर्शी प्रणाली लागू करने की मांग की।
अन्य विधेयक भी पारित
इसके अलावा, विधानसभा ने कर्नाटक कर (पेशे, व्यापार, सेवाएं और रोजगार) (संशोधन) विधेयक, 2025 को भी मंजूरी दी।
इस विधेयक में पेशेवर कर की दर को 2,400 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है। यह उन वेतनभोगी कर्मचारियों पर लागू होगा जिनकी मासिक आय 25,000 रुपये या उससे अधिक है।