एकल पीठ के आदेश को दी जा सकेगी चुनौती
न्यायमूर्ति सौमेन सेन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार और पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) को अपील दायर करने की अनुमति दे दी।
राज्य और एसएससी के वकीलों ने खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर कर अपील दायर करने की अनुमति मांगी तथा शीघ्र सुनवाई की मांग की।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सोमवार को राज्य सरकार और एसएससी को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए शिक्षण स्टाफ की चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था, जो 30 मई की भर्ती अधिसूचना के तहत शुरू हुई थी।
दागी उम्मीदवारों की भागीदारी पर रोक
अदालत ने निर्देश दिया कि उक्त चयन प्रक्रिया में, चिन्हित दागी उम्मीदवारों को भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि यदि किसी दागी उम्मीदवार ने उक्त भर्ती अधिसूचना के तहत अपनी उम्मीदवारी पेश करने के लिए आवेदन किया है, तो उसे रद्द कर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि चयन प्रक्रिया को तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 17 अप्रैल के आदेश में निर्धारित समय-सारिणी का प्राधिकारियों द्वारा कड़ाई से पालन किया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अप्रैल को राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त संस्थानों में लगभग 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को रद्द कर दिया था, क्योंकि न्यायालय ने पाया था कि चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी थी।
एसएससी की रोक लगाने की मांग खारिज
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की एकल पीठ द्वारा आदेश सुनाए जाने के बाद, एसएससी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने 30 मई की अधिसूचना के आधार पर दागी उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में भाग लेने से रोकने के संबंध में आदेश पर रोक लगाने की प्रार्थना की थी।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने उचित विचार-विमर्श के बाद प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया।
कुछ याचिकाकर्ताओं ने उच्च प्राथमिक स्तर और कक्षा 9 से 12 तक के लिए सहायक अध्यापकों के पदों पर एसएससी द्वारा भर्ती के लिए 30 मई की अधिसूचना के माध्यम से शुरू की गई नियुक्ति प्रक्रिया को एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी थी।