एक दिन में लगभग 28 छात्र कर रहे आत्महत्या
कुमार ने यह भी दावा किया कि हर घंटे दो छात्र और हर 24 घंटे में लगभग 28 छात्र आत्महत्या कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जिस तरह किसानों की आत्महत्या के लिए व्यवस्था जिम्मेदार है, उसी तरह छात्रों की आत्महत्या के लिए भी यही व्यवस्था जिम्मेदार है। यह व्यवस्था छात्रों को 'प्रेशर कुकर' बना रही है और उन्हें हर दिन सपने बेचे जा रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "कितनी सीटें हैं? परीक्षा पारदर्शी तरीके से कैसे आयोजित की जाएगी? कितने रोजगार के अवसर पैदा होंगे? ऐसे सवालों पर चर्चा नहीं होती है।"
कुमार के अनुसार, रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर देश में सिर्फ कोचिंग संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं, जो अभिभावकों से मोटी फीस वसूलते हैं।
उन्होंने कहा, "हमारी मांग है कि देश की सरकारी संस्थाओं में सुधार किया जाए और उन्हें मजबूत बनाया जाए, क्योंकि अगर वे कमजोर होंगी तो निजी क्षेत्र के लिए विकास करना मुश्किल हो जाएगा। देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी, इंजीनियर और डॉक्टर बनाने के कारोबार को विनियमित करना बहुत जरूरी है।"
रिक्त पदों को पारदर्शी तरीके से भरें
उन्होंने यह भी मांग की कि देश में सभी रिक्त पदों को पारदर्शी तरीके से भरा जाना चाहिए।
कोचिंग सेंटरों पर युवाओं के शोषण के आरोपों पर एनएसयूआई प्रभारी कुमार ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी विशेष नौकरी के लिए केवल 100 पद रिक्त हैं, तो भी लाखों अभ्यर्थी कोचिंग सेंटरों की मदद लेने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने बताया कि रिक्तियां तो वही रहेंगी, लेकिन निजी कोचिंग सेंटर उन अभ्यर्थियों की हताशा का फायदा उठाते हैं जो प्रतियोगिता में सफल होना चाहते हैं।
कुमार ने आरोप लगाया कि अनुचित प्रतिस्पर्धा की संस्कृति बनाने के लिए सरकार और बाजार की ताकतों के बीच सांठगांठ है।
उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी कुछ युवाओं को एक करोड़ रुपये का पैकेज मिलने का दावा किया जाता है, ताकि अन्य असहाय छात्र इन कोचिंग सेंटरों की ओर आकर्षित हो सकें। उन्होंने पूछा कि कितने युवाओं को ऐसे पैकेज मिलते हैं।