समस्या का अलार्म
चिंता को एक चेतावनी संकेत की तरह समझें। इसका उद्देश्य आपका दिन खराब करना नहीं है, बल्कि यह आपको बताती है कि आपके पास कोई समस्या मौजूद है, जिसका समाधान करने की जरूरत है। घबराने या इससे बचने के बजाय रुकें और खुद से पूछें कि यह आपको क्या बताने की कोशिश कर रही है? एक बार जब आप यह मालूम कर लेते हैं, तो आप समस्या का समाधान आसानी से ढूंढ पाएंगे। इससे आपकी चिंता कम होने लगती है।
डरे नहीं, इस्तेमाल करें
जब चिंता आप पर हावी हो जाए, तो उससे लड़ने की कोशिश न करें। इसके बजाय उसे नियंत्रित करने के लिए उसे किसी ऐसे व्यक्ति का नाम दें, जो आपके लिए मायने रखता हो। यह चिंता पर काबू पाने का बेहद सरल तरीका है। इससे दिमाग को भावनाओं को संभालने, समस्याओं को हल करने और प्रभावी ढंग से योजना बनाने में भी मदद मिलती है। याद रखें आप अपनी भावनाओं का वर्णन किस तरह करते हैं, यह पूरी तरह से आप पर ही निर्भर करता है।
सकारात्मक तरीका मस्तिष्क को मुश्किल क्षणों को संभालने और स्मार्ट समाधान निकालने में मदद करता है। इसलिए जितना अधिक आप चिंता को ऐसी चीज के रूप में देखेंगे, जो आपकी मदद कर सकती है, उतना ही अधिक आप इसे डर के बजाय ईंधन के रूप में उपयोग करने के तरीके खोज पाएंगे।
अपनाना सीखें
चिंता का बहुत ज्यादा होना भले ही हानिकारक हो सकता है, लेकिन इसका बिल्कुल न होना भी एक समस्या है। सही मात्रा में चिंता का होना वास्तव में आपको सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद कर सकता है। यह समझने की कोशिश करें कि यह आपसे क्या करवाने की कोशिश कर रही है। आपको आभास होगा कि यह अक्सर आपको कार्य करने के लिए ही प्रेरित करेगी।
एक जर्मन अध्ययन में पाया गया कि जब लोग अपनी चिंता को अपना लेते हैं और मानते हैं कि वे इसे संभाल सकते हैं, तो यह उनके लिए लाभदायक हो जाती है। आप हमेशा चिंता को जाहिर होने से तो नहीं रोक सकते, लेकिन इसे देखने का आपका नजरिया ज्यादा मायने रखता है।