Career Tips: ज्यादातर लोग बातचीत में केवल अपनी सफलताओं को याद रखते हैं, लेकिन यकीन मानिए असफलताएं मानस पर एक गहरी छाप छोड़ती हैं। असफल होना तो सीखने का एक माध्यम है, खासकर जब यह बातचीत से जुड़ा हो। बातचीत का यह तरीका इंटरव्यू, किसी सार्थक मुद्दे पर बहस या ग्रुप-डिस्कशन करना जैसा कुछ भी हो सकता है। कभी-कभार अच्छे वार्ताकार भी अपनी बात को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं। ऐसे में, स्वयं को कसूरवार ठहराने के बजाय यह जानने कि कोशिश करनी चाहिए कि इन असफलताओं या गलतियों से कैसे और क्या सीखा जाए? इन्हें आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखें। इसके लिए, यह समझना जरूरी है कि वे क्यों और कैसे हुईं? कुछ कदम उठाकर आप ऐसा कर सकते हैं।
असफलता को नकारें नहीं
असफलता से सीखने का पहला कदम उसे नकारने के बजाय स्वीकार करना है। बहुत से लोग यह स्वीकार करने से कतराते हैं कि बातचीत वास्तव में विफल रही। इससे उनके लक्ष्य अप्राप्त रह जाते हैं। जरूरी नहीं कि हर बातचीत सफल हो ही जाए। ऐसे में, आगे बढ़ने के लिए वास्तविकता का सामना करना जरूरी हो जाता है। विफलता को स्वीकार करने से आप सीख सकते हैं और आगे की बातचीत को बेहतर बना सकते हैं।
आकलन करें
असफल बातचीत से सीखने का अगला चरण यह है कि क्या गलत हुआ और क्यों? इसका मुख्य कारण जानने के लिए समग्र स्थिति को देखना जरूरी है। स्थिति का विश्लेषण करके आप उस सटीक क्षण की पहचान कर सकते हैं, जहां बातचीत में कोई गलती हुई हो। आप वार्ता को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करके तथा प्रगति में बाधा डालने वाले विशिष्ट कार्यों और निर्णयों का आकलन करके इसकी पहचान कर सकते हैं।
सबक सीखें
तीसरा चरण इन गलतियों से सबक सीखना और भविष्य में उन्हें लागू करना है। हालांकि, सभी बातचीत एक जैसी नहीं होती है। किसी स्थिति में जो कामयाब या नाकाम रही, वह दूसरी स्थिति में भी लागू, ऐसा जरूरी नहीं है। जब कोई नई बातचीत शुरू करें, तो यह समझने के लिए एक गहन तुलनात्मक विश्लेषण करें कि यह पिछले अनुभव से कैसे मेल खाती है या उससे कैसे अलग है? साथ ही, चुनौतियों के आधार पर अपने दृष्टिकोण में बदलाव करें। कहने का आशय है कि अपने अनुभवों से सीखें।
आत्म-सुधार की ओर
उन कमजोरियों को पहचानें, जिन्होंने विफल वार्ता में भूमिका निभाई और उन्हें सुधारने के लिए अपना पूरा जोर लगा दें। इसके लिए बातचीत का पूरी ईमानदारी से विश्लेषण करें और नए तथा अधिक प्रभावी कौशल सीखने पर जोर दें। आखिर में, यदि आपके पास बातचीत करने का दूसरा मौका है, तो पूरे आत्मविश्वास के साथ उसके लिए खुद ही पहल करें।