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UPSC परीक्षा में बड़ा बदलाव, आप भी कर लें तैयारी

Wed, 30 Sep 2015 05:59 PM IST
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
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भारत सरकार सिविल सर्विस यानी संघ लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा की पद्धति में बडा बदलाव करने जा रही है और इसके लिए एक समिति बनाने की घोषणा की गई है। कार्मिक, पेंशन और जन शिकायत विभाग के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में सरकार के इस फैसले की घोषणा की।
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उनके मुताबिक सरकार चाहती है कि संघ लोक सेवा आयोग की इस सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लेने वाले सभी अभ्यार्थियों को समान अवसर मिले। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के बारे में कहा जाता रहा है कि गणित, मेडिकल और इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले अभ्यार्थियों को कला क्षेत्र के विषयों को चुनने वाले अभ्यार्थियों से ज्यादा नंबर हासिल करने का मौका मिलता रहा है।

अब सरकार इस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को इस तरह पिरोना चाहती है 'जिसमे 21 वीं सदी के भारत' को देखते हुए ही प्रतियोगियों का चयन किया जा सके। कार्मिक, पेंशन और जन शिकायत विभाग के उप निदेशक वी बालकृष्ण ने बीबीसी से कहा कि सरकार की ओर से गठित कमेटी पाठ्यक्रम के अलावा पैटर्न, योग्यता, आयु सीमा में छूट में बदलाव पर विचार करेगी।
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उम्र की सीमा पर पुनर्विचार होना जरूरी

इस कमेटी का नेतृत्व छत्तीसगढ कैडर के आईएएस अधिकारी रहे बीएस बस्वान करेंगे जबकि इसमें नौकरशाहों के अलावा शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को भी रखा जा रहा है।

बालकृष्ण कहते हैं, "बीएस बस्वान के अलावा इस कमेटी में कौन होंगे, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है मगर यह सही है कि यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा के पाठ्यक्रम और पैटर्न का रिव्यू किया जाएगा।

जो भी बदलाव लाए जाएंगे वो समिति की अनुशंसा के आधार पर ही लाए जाएंगे"। भारत सरकार में कैबिनेट सेक्रेटरी रह चुके टीएसआर सुब्रमण्यम का कहना है कि समय समय पर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा का रिव्यू होते रहना चाहिए। उनका कहना है कि उम्र की सीमा बढा दी गई है जिस पर पुनर्विचार होना जरूरी है।
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आर्ट साइड के छात्रों को होता था नुकसान

पिछले साल यूपीएससी की परीक्षा को लेकर काफी हंगामा हुआ था जिसके बाद सामान्य ज्ञान के दूसरे पर्चे से अंग्रेजी को हटा दिया गया था। इस आंदोलन से जुडे रहे नलिन मिश्रा भी मानते हैं कि परीक्षा के पैटर्न और पाठ्यक्रम में बदलाव होना जरूरी है क्योंकि इसमें कला जैसे विषयों को लेकर पढने वाले छात्रों को तुलनात्मक रूप से नुकसान उठाना पडता था।

सरकार का कहना है कि बस्वान की अगुवाई में बनाई जा रही कमेटी छह महीनों के अंदर ही अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि सीसैट के प्रश्नपत्र को जारी रखा जाए या फिर इसका भी प्रारूप बदला जाना चाहिए।
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