उत्तर प्रदेश के माध्यमिक एवं डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के चयन के लिए गठित भर्ती आयोगों का काम ठप पड़ा हुआ है। सरकार की ओर से भर्ती आयोग में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति न किए जाने से माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई का काम भी तेजी से पिछड़ रहा है।
अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति में देरी किए जाने से प्रतियोगी छात्रों का गुस्सा भी भड़क रहा है। यही हाल उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का है, वहां भी अध्यक्ष एवं सदस्यों के अभाव में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है।
चयन बोर्ड एवं उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में मिलाकर 25 हजार से अधिक पदों पर चयन नहीं हो सका है।
सरकार की ओर से मनमाने तरीके से इन भर्ती आयोगों में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति किए जाने को कोर्ट में चुनौती दिए जाने और हाईकोर्ट से अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिए जाने के बाद माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ गई है।