इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की अध्यक्ष ऋतुपर्ण चक्रवर्ती के अनुसार, अगले साल इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण, रिटेल और एफएमसीजी सेक्टर में नई नौकरियों का ज्यादा सृजन होगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक, ई-कॉमर्स, स्टार्ट-अप, उपभोक्ता वस्तुओं और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नौकरियां बढ़ेंगी। नॉन मेट्रो शहरों में रीटेल कारोबार का विस्तार होने से इस क्षेत्र में नई नौकरियों के सृजन की संभावना काफी ज्यादा है।
आईटी क्षेत्र में रहेगी किल्लत
वर्ष 2019 में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नौकरियों का टोटा रहेगा। इससे पहले के दो वर्षों तक नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने और कुशल पेशेवरों की मौजूदगी से इस क्षेत्र में काफी नौकरियां पैदा हुईं। आईटी के अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और टेलीकॉम क्षेत्र में भी नई नौकरियों का सृजन मुश्किल होगा।
भारत में वेतन बढ़ोतरी सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वर्ष 2019 के दौरान भारत में वेतन बढ़ोतरी की दर सबसे ज्यादा रहेगी। इसका औसत आंकड़ा 9 से 10 फीसदी तक रहेगा। ग्लोबल हंट के एमडी सुनील गोयल का कहना है कि बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की 15 से 20 फीसदी तक वेतन बढ़ोतरी हो सकती है, वहीं औसत प्रदर्शन करने वालों को 5 से 8 फीसदी तक ही संतोष करना पड़ेगा। इस दौरान विशेष दक्षता रखने वालों को कंपनियां 50 फीसदी तक वेतन बढ़ोतरी का तोहफा दे सकती हैं।
तकनीक पर रहेगा जोर
इंडीड इंडिया के प्रबंध निदेशक शशि कुमार का कहना है कि नई नौकरियों के लिए तकनीक पर ज्यादा जोर रहेगा। ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले पेशेवरों को कंपनियां मोटे पैकेज पर हायर कर सकती हैं। इसके उलट तकनीक के बढ़ते चलन से उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र की शुरुआती नौकरियों पर संकट आ सकता है।