एआई के कारण भर्ती पैटर्न में बदलाव
अध्ययन के मुताबिक 63 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि अब उन्हें ऐसे कर्मचारियों की अधिक जरूरत है जिनके पास डोमेन विशेषज्ञता के साथ-साथ एआई या डेटा से जुड़े कौशल भी हों, क्योंकि एआई उनके मुख्य कामकाज का हिस्सा बन चुका है। इससे साफ है कि पारंपरिक कौशल के साथ तकनीकी दक्षता की मांग तेजी से बढ़ रही है।
‘एआई एंड जॉब्स: दिस टाइम इज नो डिफरेंट’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट भारत में जेनरेटिव एआई की कंपनी स्तर पर स्वीकार्यता का आकलन करती है। यह अध्ययन नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच किया गया, जिसमें देश के 10 शहरों की 650 आईटी कंपनियों की प्रतिक्रियाएं शामिल की गईं।
इसमें बताया गया, "कंपनियों ने कहा है कि एआई की वजह से नियुक्तियों में मामूली कमी आई है। मुख्य रूप से प्रवेश स्तर पर ऐसा देखने को मिल रहा है। साथ ही मध्यम और शीर्ष स्तर पर भर्तियों में स्थिरता भी है।"
एआई से बढ़ी मांग, लेकिन प्रशिक्षण अभी सीमित
रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपर और डेटाबेस प्रशासक जैसे एआई-आधारित कार्यक्षेत्रों में मांग सबसे अधिक बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि तकनीकी भूमिकाओं में एआई कौशल अब प्रमुख आवश्यकता बनता जा रहा है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि एआई से प्रभावित 1,900 से अधिक कारोबारी खंडों में उत्पादकता में वृद्धि, गिरावट की तुलना में काफी ज्यादा रही है। यानी एआई अपनाने से अधिकतर क्षेत्रों में कार्यकुशलता बेहतर हुई है।
सर्वे में शामिल आधे से अधिक कंपनियों ने बताया कि वे जागरूकता कार्यक्रमों या प्रशिक्षण के माध्यम से कर्मचारियों को एआई अपनाने में मदद कर रही हैं, जबकि 38 प्रतिशत कंपनियां ऐसी पहल शुरू करने की तैयारी में हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रशिक्षण का दायरा अभी सीमित है और बहुत कम कंपनियों ने बताया कि पिछले वर्ष उनके आधे से ज्यादा कर्मचारियों ने एआई से जुड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया है।