झारखंड के जारमुंडी में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक महिला ने बच्ची को जन्म देने के बाद उसे यह कहकर अपनाने से इंकार कर दिया कि उसने एक बेटे को जन्म दिया था।
हालांकि महिला को जल्द ही अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी, बाद में उसने स्वीकार किया कि उसने अपने पति और घरवालों की इच्छा पूरी करने के लिए ऐसा किया।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार घर वालों के भी इस मामले में साथ देने के कारण आरोपी महिला ललिता देवी ने बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने का दावा भी कर दिया। उसके इस दावे ने एक बार को अस्पताल अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया।
अस्पताल प्रबंधन पर ही लगा दिया हेराफेरी का आरोप
घरवालों ने दावा किया कि ललिता देवी ने बीते मंगलवार को जारमुंडी के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक लड़के को जन्म दिया था। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक जन्म के कुछ देर बाद ही ललिता देवी ने अस्पताल के स्टाफ के साथ मिलीभगत कर लड़की को एक अन्य लड़के के साथ बदल दिया।
वहीं जिस महिला का बच्चा बदला गया उसकी सास पीसीया देवी ने बताया कि मेरी बहू को नर्स डिलीवरी के लिए लेबर रूम में लेकर गई थी जहां कुछ देर बाद मुझे बताया गया कि उसने बेटे को जन्म दिया है लेकिन जब हमारे हाथ में बच्चा दिया गया तो वो लड़की थी।
वहीं अस्पताल के अधिकारियों के लिए स्थिति उस समय दुश्वर हो गई जब पता चला कि जरमुंडी ब्लाक के अंतर्गत धामना गांव के रहने वाले ललिता देवी के परिजन काफी संख्या में एकत्र होकर अस्पताल पहुंच गए।
डीएनए टेस्ट की बात पर खींच लिए पांव
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर बच्चों के अदला बदली का गिरोह चलाने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मामला उस समय कुछ हल होता दिखा जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के इंचार्ज डा. रमेश कुमार ने उस दिन सुबह जन्म लेने वाले चारों बच्चों का डीएनए टेस्ट कराने की बात कही।
वहीं मामला खुलता देख ललिता और उसके परिवार के लोगों ने इससे हाथ खींचना शुरू कर दिया। डा. रमेश कुमार ने बताया कि ललिता और उसके परिजन उससे बेटे की उम्मीद कर रहे थे। उसके पहले भी एक बेटी है।
जब उन्हें पता चला कि ललिता के अलावा यहां तीन और महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया है तब उन्होंने गलत दावा करने की प्लानिंग शुरू कर दी। वहीं जब बात डीएनए टेस्ट की आई तो पोल खुलने के डर से पांव पीछे खींच लिए।