ग्रामीणों का कहना है कि सीआरपीएफ के यहां आने के बाद से डर खत्म हो गया है। नक्सलियों ने जंगलों और खेतों में बम लगाए हुए थे। बूढ़ा पहाड़ इलाके के ग्रामीणों ने बताया, हमें खाद्यान्न की निर्बाध आपूर्ति मिल रही है।
सीआरपीएफ ने इसी साल सितंबर माह में झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराया था। यह इलाका तीन दशक से नक्सलियों के कब्जे में था। नक्सलियों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन ऑक्टोपस चला गया था। बूढ़ा पहाड़ इलाके के गांवों में स्थिति सामान्य होने का लाभ अब ग्रामीणों को मिलना शुरू हो गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि सीआरपीएफ के यहां आने के बाद से डर खत्म हो गया है। नक्सलियों ने जंगलों और खेतों में बम लगाए हुए थे। बूढ़ा पहाड़ इलाके के ग्रामीणों ने बताया, हमें खाद्यान्न की निर्बाध आपूर्ति मिल रही है और अब हम व्यावसायिक गतिविधियों को भी जारी रख सकते हैं। नक्सली ग्रामीणों का अपहरण कर लेते थे। हम रात में बाहर भी नहीं निकल पाते थे। अब वह डर चला गया है।
सीआरपीएफ के झारखंड रेंज के आईजी अमित कुमार ने बताया, बूढ़ा पहाड़ झारखंड और छत्तीसगढ़ के साथ तीन जिलों में फैला हुआ है। यह नक्सलियों का गढ़ था। ऑपरेशन ऑक्टोपस दो चरणों में शुरू किया गया था। पहला चरण अगस्त में शुरू किया गया था, जब सुरक्षाबलों ने नक्सली ठिकानों का दौरान किया था।