शिक्षकों से उम्मीद की जाती है कि वे छात्रों को अच्छी शिक्षा दें, उन्हें बेहतर नागरिक बनाएं, उन्हें इस लायक बनाएं कि वे अपने पैरों पर खड़े हों सकें।
लेकिन झारखंड में मॉडल स्कूल के शिक्षकों के पांव तो खुद ही लड़खड़ा रहे हैं। यहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को अच्छ शिक्षा देने के लिए मॉडल स्कूलों की स्थापना की गई थी।
अब हालत यह है कि यहां इन शिक्षकों को 11 महीने से वेतन नहीं मिला है और वे उधार लेकर जीवन जीने को मजबूर हैं।
झारखंड में मानव संसाधन विकास विभाग ने बिना आधारभूत संरचना और स्थाई शिक्षकों की बहाली किए स्कूल तो शुरू कर दिए, लेकिन यहां रखे गए अनुबंधित शिक्षकों को मानदेय देना ही भूल गया।
पिछले 11 महीने से रांची सहित राज्य भर के मॉडल स्कूलों में काम करने वाले इन शिक्षकों को मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। मॉडल स्कूलों के ज्यादातर शिक्षक ग्रामीण इलाकों से आते हैं।
ये किसी तरह दूसरों से उधार लेकर अपना काम चला रहे हैं। रांची के आठ मॉडल स्कूलों में 21 और पूरे राज्य में करीब 250 शिक्षक कार्यरत हैं।
पूरे राज्य में कुल 89 मॉडल स्कूलों में पढऩे वाले 3000 से अधिक स्टूडेंट्स हैं। इन्हें प्रति घंटा 120 रुपए के हिसाब से भुगतान देने का नियम है। इधर, रांची के डीईओ एमके सिंह कहते हैं कि विभाग से अभी राशि नहीं मिली है। राशि मिलते ही सभी शिक्षकों को भुगतान कर दिया जाएगा।