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टीबी के मरीजों का एक गांव, जानते हैं आप?

Fri, 15 May 2015 06:13 PM IST
रवि प्रकाश / रांची से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
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झारखंड के हजारीबाग जिले का एक गांव है नापो। ईंट पाथने वाले दलितों के इस गांव में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे उसकी पहचान माना जाए, सिवाए घातक किस्म के एमडीआर यानी मल्टी ड्रग रजिस्टेंट टीबी के।
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नापो जाने से पहले लोग साफ-साफ कह देते हैं कि चाहे गर्मी लगे या घुटन महसूस हो, मुंह पर कपड़ा बांधे बिना इस गांव के किसी व्यक्ति से बात न करें। यहां एक व्यक्ति एमडीआर टीबी से संक्रमित होता है। मरने से पहले वह कई दूसरे लोगों को संक्रमित कर जाता है।

तिलुआ देवी 40 साल की थीं। उन्हें चार साल पहले टीबी हुआ था। पिछले साल उनका निधन हो गया था। पिछले एक महीने से उनके बेटे अजय को खांसी आ रही है। उन्हें खून की उल्टियां हो रही हैं।
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तिलुआ देवी न पहली थीं और न अंतिम। उन्हें एमडीआर टीबी था। यह टीबी का एक ऐसा प्रकार है, जिस पर एंटीबॉयोटिक दवाएं तक असर करना बंद कर देती हैं।

खतरनाक बीमारी

झारखंड के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य में हर रोज 40 लोगों की मौत टीबी से होती है। राज्य का हर 11वां मरीज एमडीआर से पीड़ित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस मामले में भारत और अफ्रीका को एक साथ रखता है। झारखंड में हर रोज 40 लोगों की मौत टीबी से हो जाती है। इसी गांव की भगिया, सुशीला, बबन भुइयां, बाघा भुइयां, सुकुर भुइयां, अजय भुइयां, धीरज भुइयां टीबी से पी़ड़ित हैं। इनमें से कई को एमडीआर टीबी है।

कुछ लोग बता देते हैं कि वो एमडीआर टीबी के मरीज हैं। कुछ लोग इस बात को छुपा लेते हैं, क्योंकि टीबी का मरीज बताने पर ईंट भट्ठे वाले काम नहीं देंगे। इससे वो बीमारी की जगह भूख से मर जाएंगे।

एमडीआर टीबी के मरीजों को गहन देखभाल की जरूरत होती है। उन्हें नियमित तौर पर अस्पताल जाना होता है। लेकिन नजदीकी स्वास्थ्य उपकेंद्र हेसालौंग में केवल एक डॉक्टर तैनात है।
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डॉक्टर रांची में

गांव में सक्रिय माले कार्यकर्ता पच्चू राणा बताते हैं, "केंद्र में डॉक्टर कभी नहीं मिलते। एएनएम और इसी अस्पताल से रिटायर्ड कंपाउंडर रामप्रवेश यादव के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र का काम चलता है। कुछ दिन पहले यहां एक नए डॉक्टर की नियुक्ति हुई है। लेकिन उन्हें हम लोगों ने अब तक नहीं देखा। वो रांची में रहते हैं।"

गांव के स्वास्थ्य केंद्र में जो रजिस्टर रखा है, उसे अंतिम बार जून 1999 में अपडेट किया गया था। इस सवाल पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि वो डॉक्टरों की एक टीम शीघ्र ही नापो भेजेंगे। उन्होंने कहा कि गांव के हर आदमी का टेस्ट और इलाज कराया जाएगा।

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